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Stamp Duty Reduction : स्टाम्प शुल्क में कमी से ग्रामीण क्षेत्रों को राहत, वर्ग मीटर दर समाप्त

By Newsdesk Admin
14/12/2025
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Stamp Duty Reduction
Stamp Duty Reduction

सीजी भास्कर, 14 दिसंबर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुसार वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भूमि मूल्यांकन व्यवस्था (Stamp Duty Reduction) को अधिक सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पेरी-अर्बन ग्रामों एवं अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में लागू वर्ग मीटर दर को पूर्णतः समाप्त कर दिया है।

इस निर्णय के बाद ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन केवल हेक्टेयर दर के आधार पर किया जाएगा, जिससे स्टाम्प शुल्क में कमी (Stamp Duty Reduction) के रूप में आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

पूर्व व्यवस्था के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर (Stamp Duty Reduction) तक की भूमि का मूल्यांकन वर्ग मीटर दर से तथा 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जाता था। चूंकि वर्ग मीटर दर अपेक्षाकृत अधिक होती थी, इसलिए छोटे भू-खण्डों पर अधिक मूल्य और स्टाम्प शुल्क देय होता था, जबकि बड़े क्षेत्रफल की भूमि का मूल्यांकन अपेक्षाकृत कम हो जाता था। इस विसंगति को समाप्त करते हुए सरकार ने सभी ग्रामीण भूमि के लिए एक समान हेक्टेयर आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू की है, जिससे स्टाम्प शुल्क में कमी (Stamp Duty Reduction) सुनिश्चित हुई है।

इस निर्णय से भू-अर्जन मामलों में भूमि के वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उदाहरण के तौर पर बालोद जिले के ग्रामीण क्षेत्र देवारभाट में पूर्व व्यवस्था के तहत 500 वर्ग मीटर भूमि (Stamp Duty Reduction) का मूल्यांकन 9 लाख 25 हजार रुपये किया जाता था।

जबकि 1000 वर्ग मीटर भूमि का मूल्यांकन मात्र 3 लाख 67 हजार रुपये किया जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वर्ग मीटर दर समाप्त होने से 500 वर्ग मीटर भूमि का मूल्यांकन 6 लाख रुपये तथा 1000 वर्ग मीटर भूमि का मूल्यांकन 12 लाख रुपये किया जा रहा है, जो पूरी तरह तर्कसंगत है।

वर्ग मीटर दर समाप्त होने का सीधा प्रभाव स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क पर भी पड़ा है। उप-पंजीयक कार्यालय बालोद में 9 अक्टूबर 2025 को पंजीकृत एक दस्तावेज के अनुसार ग्राम देवारभाट में 15 डिसमिल भूमि के पंजीयन पर पूर्व व्यवस्था में 7 लाख 90 हजार रुपये का बाजार मूल्य निर्धारित किया गया था, जिस पर 74 हजार 900 रुपये स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क देय था।

नई व्यवस्था लागू होने के पश्चात उसी भूमि का बाजार मूल्य 4 लाख 80 हजार रुपये निर्धारित हुआ और केवल 45 हजार 500 रुपये स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क अदा करना पड़ा। इस प्रकार संबंधित पक्षकार को 29 हजार 400 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ, जो स्टाम्प शुल्क में कमी (Stamp Duty Reduction) का स्पष्ट उदाहरण है।

राज्य सरकार के इस फैसले से किसानों, भू-धारकों और आम खरीदारों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिली है। भूमि का मूल्यांकन वास्तविक और किफायती दरों पर होने से रजिस्ट्री की लागत घटी है और ग्रामीण एवं पेरी-अर्बन क्षेत्रों में भूमि क्रय करना अधिक सुलभ हुआ है। स्टाम्प शुल्क में कमी (Stamp Duty Reduction) से रियल एस्टेट, आवास निर्माण और विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

सरकार का यह निर्णय ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी जनता के हित में दूरगामी प्रभाव वाला कदम है। भूमि एवं आवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुलभ, किफायती और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह सुधार एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है, जिससे हजारों नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

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