सीजी भास्कर 15 दिसम्बर Namo Bharat Corridor Impact : एनसीआर में आधुनिक परिवहन का सपना दिखाने वाली नमो भारत ट्रेन परियोजना अब जमीनी हकीकत में कई परिवारों की चिंता बनती जा रही है। गुरुग्राम से फरीदाबाद, नोएडा होते हुए ग्रेटर नोएडा तक प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ तय मानी जा रही है।
सर्वे रिपोर्ट ने खोली तस्वीर
परियोजना से जुड़े सामाजिक-आर्थिक सर्वे में सामने आया है कि इस पूरे रूट पर 286 घर और दुकानें सीधे बाधा के रूप में चिन्हित की गई हैं। यही नहीं, 13 धार्मिक ढांचे और धर्मशालाएं भी इस लाइन के रास्ते में आ रही हैं, जिन्हें हटाने की तैयारी है।
कहां-कहां पड़ेगा असर
प्रस्तावित रूट इफको चौक (गुरुग्राम) से शुरू होकर फरीदाबाद, नोएडा और फिर ग्रेटर नोएडा तक जाएगा। पियाली चौक, शहीद चौक, एनआईटी स्टेशन क्षेत्र और नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट के कई हिस्से इस दायरे में आते हैं, जहां आबादी पहले से घनी है।
1255 लोगों की छत और रोज़गार पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित 286 परिवारों में लगभग 1255 लोग रह रहे हैं। इनमें कई ऐसे हैं जिनकी आजीविका सीधे दुकान या छोटे व्यावसायिक ढांचों से जुड़ी है। उनके लिए यह सिर्फ मकान टूटने का नहीं, बल्कि रोज़गार छिनने का डर भी है।
स्थानीय लोगों की चिंता और नाराज़गी
इलाकों में रहने वाले लोग खुलकर कह रहे हैं कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पुनर्वास और मुआवजे को लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं है। सवाल यही है कि जिनके घर और दुकानें हटेंगी, उन्हें कब, कहां और किस आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था मिलेगी।
प्रशासन की दलील
परियोजना से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि नमो भारत कॉरिडोर एनसीआर की यातायात व्यवस्था को नया आकार देगा। प्रभावित परिवारों को नीति के तहत मुआवजा और पुनर्वास दिया जाएगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर लोग अभी ठोस टाइमलाइन और लिखित आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं।
विकास बनाम विस्थापन की बहस
नमो भारत ट्रेन जहां तेज़, आधुनिक और कनेक्टेड एनसीआर का सपना दिखाती है, वहीं यह बहस भी तेज़ कर रही है कि क्या विकास की रफ्तार में आम लोगों के आशियानों की कीमत चुकाना अनिवार्य है।


