सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित (Urban Development Meet) में देशभर के शहरी विकास से जुड़े मुद्दों और योजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शहरों के विकास के लिये केन्द्र सरकार से मिलने वाली बजट राशि का समय पर और सही उपयोग किया जाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है और इसे हासिल करने के लिए शहरी भारत को भविष्य की जरूरतें ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। यही प्रयास भारत को (Urban Development Meet) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित और आत्मनिर्भर बनाएंगे।
श्री मनोहर लाल ने कहा कि अनुमान के अनुसार, वर्ष 2047 तक भारत की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा शहरी क्षेत्रों में बस सकता है। इसलिए योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन समय की मांग के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर राज्य की भौगोलिक स्थितियां अलग हैं और इन्हीं भिन्नताओं को समझते हुए शहरी कार्य मंत्रालय ने क्षेत्रीय स्तर पर (Urban Development Meet) आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ेगा।
बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री, राज्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के लिए तैयार कार्य दिशा पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसे (Urban Development Meet) के अगले चरणों का मार्गदर्शन माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रमुख चर्चाएं
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और शहरी परिवहन व्यवस्थाओं पर व्यापक चर्चा हुई। मंत्री श्री मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत बने मकानों के आवंटन में देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि जनता की वित्तीय भागीदारी को प्रभावी बनाकर परियोजना को और सफल बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राइवेट रियल्टी सेक्टर की भागीदारी को मजबूत करना आवास निर्माण को गति देगा और (Urban Development Meet) के उद्देश्यों के अनुरूप मजबूत आधार तैयार करेगा।
मध्यप्रदेश: आत्मनिर्भर शहरी निकायों की दिशा में प्रयास
मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि राज्य में नगरीय निकायों को आर्थिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। नर्मदा नदी के किनारे बसे शहरों में सीवेज कार्यों को प्रमुखता दी गई है।
संपत्तियों की जीआई मैपिंग से राज्य में संपत्ति कर में 150 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मंत्री ने अमृत योजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की। यह कार्य सीधे तौर पर (Urban Development Meet) के एजेंडे को मजबूत कर रहा है।
डिजिटल सेवाओं और नवाचार पर ध्यान
बैठक में शहरी सेवाओं पर केंद्रित वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें पानी के सदुपयोग, अर्बन लॉकर, वाहन ईंधन निगरानी सिस्टम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी दी गई। बैठक की शुरुआत में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने विभागीय उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया—जिसे (Urban Development Meet) के सकारात्मक परिणामों का उदाहरण माना जा रहा है।
योजनाओं की समीक्षा और भविष्य की रणनीति
अगले सत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की प्रगति, चुनौतियों और समाधान पर चर्चा हुई। बताया गया कि 9 लाख 46 हजार आवासों में से 8 लाख 79 हजार आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत 60 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा हितग्राहियों की आवास सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया—जो (Urban Development Meet) के विकास दृष्टिकोण को और मजबूत करता है।
शहरी परिवहन क्षेत्र में ई-बस सेवा, बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन निर्माण की प्रगति साझा की गई। अमृत योजना के 6,500 प्रकरणों में स्वीकृति जारी है और ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की गई है। अमृत 3.0 योजना में पानी टेस्टिंग कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को तेज करने पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 9 सीएनजी प्लांट प्रस्तावित हैं, जबकि इंदौर का बायो-सीएनजी प्लांट राष्ट्रीय पहचान बना चुका है।
इन सभी प्रयासों के साथ शहरी विकास योजनाओं की गति में तेजी आई है। आने वाले वर्षों में शहरी भारत की संरचना आधुनिक, टिकाऊ और समावेशी बनाने के लिए यह (Urban Development Meet) महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगी।


