Vinod Kumar Shukla Death News: हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित स्तंभ और ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया। नई दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने की खबर सामने आते ही साहित्यिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। एक ऐसा लेखक, जिसने बिना शोर किए शब्दों से पूरी पीढ़ियों को संवेदनशील बनाया, आज हमेशा के लिए मौन हो गया।
लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे
89 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल पिछले कुछ समय से गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित थे। उन्हें इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के साथ निमोनिया ने भी जकड़ लिया था। उम्र और अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका ।
सादगी में रचा गया था उनका साहित्य संसार
विनोद कुमार शुक्ल का लेखन शोर नहीं करता था, बल्कि चुपचाप पाठक के भीतर उतर जाता था। उनकी रचनाएं आम जीवन, साधारण मनुष्य और रोजमर्रा की भावनाओं को असाधारण गरिमा देती थीं। वे उन दुर्लभ लेखकों में थे, जिनकी भाषा सरल थी, लेकिन असर गहरा और स्थायी था ।
पाठकों और लेखकों की आंखें नम
उनके निधन के बाद देशभर से लेखक, पाठक और साहित्य प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सोशल मंचों से लेकर साहित्यिक समूहों तक, हर जगह एक ही भाव है—एक युग का अंत। उनके शब्द, उनकी संवेदना और उनका दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को मार्ग दिखाते रहेंगे।
विचारों में जीवित रहेंगे विनोद कुमार शुक्ल
शरीर भले ही साथ छोड़ गया हो, लेकिन विनोद कुमार शुक्ल अपने विचारों, कविताओं और कहानियों में जीवित रहेंगे। हिंदी साहित्य ने आज एक ऐसा रचनाकार खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।


