India Security Doctrine 2025 : साल 2025 भारत के सुरक्षा विमर्श में एक ठोस बदलाव लेकर आया। नेतृत्व ने साफ कर दिया कि अब आतंकी हमलों पर प्रतिक्रिया केवल बयानबाज़ी या प्रतीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। संदेश सीधा था—हमला होगा, तो जवाब तय समय में और तय तरीके से मिलेगा।
आतंक पर ‘नो-टॉलरेंस’ की स्पष्ट रेखा
सरकार की नई सोच में यह बात प्रमुख रही कि आतंकवाद और उसके समर्थकों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा। परमाणु धमकियों को कार्रवाई में बाधा मानने से इनकार किया गया और यह स्पष्ट किया गया कि संवाद का दायरा केवल आतंकवाद तक सीमित रहेगा, उससे आगे नहीं।
ऑपरेशन सिंदूर ने बदली रणनीति
7 मई 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर ने सुरक्षा नीति को ज़मीन पर उतार दिया। पहलगाम हमले के बाद की गई यह कार्रवाई सीमा के पार जाकर की गई सबसे निर्णायक सैन्य प्रतिक्रिया मानी गई। संदेश साफ था—खतरा जहां होगा, जवाब वहीं दिया जाएगा।
सटीक कार्रवाई, बड़ा प्रभाव
इस अभियान में पहली बार परमाणु क्षमता वाले देश के भीतर कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। पंजाब प्रांत के मध्य इलाकों तक सीमित, लेकिन प्रभावशाली हमलों में बड़ी संख्या में आतंकी ढांचे नष्ट किए गए। 10 मई को कई हवाई ठिकानों पर की गई कार्रवाई ने विरोधी की वायु रक्षा तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए।
स्वदेशी हथियारों का आत्मविश्वास
अभियान के दौरान स्वदेशी तकनीक का भरोसेमंद इस्तेमाल देखने को मिला। ब्रह्मोस मिसाइल, आधुनिक लड़ाकू विमान और ड्रोन के समन्वय ने यह दिखाया कि भारत अब तकनीक के मोर्चे पर भी किसी पर निर्भर नहीं है।
रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़त
2025 में रक्षा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन दोनों ने नया स्तर छुआ। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन कई गुना बढ़ा, जबकि बजट विस्तार ने सैन्य तैयारियों और बुनियादी ढांचे को मजबूती दी। निर्यात के मोर्चे पर भी भारत की मौजूदगी वैश्विक स्तर पर बढ़ी।
परीक्षण और उपलब्धियों का साल
इस साल स्वदेशी हथियारों की तैनाती, नौसेना के नए प्लेटफॉर्म और मिसाइल परीक्षणों ने रणनीतिक क्षमता को और धार दी। रेल आधारित मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण जैसी पहलों ने भविष्य की लड़ाइयों की दिशा भी तय की।
उद्योग, सुधार और आत्मनिर्भरता
नई रक्षा खरीद नियमावली के लागू होने से निजी क्षेत्र और छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने का मौका मिला। औद्योगिक गलियारों में निवेश बढ़ा और प्रक्रियाएं सरल की गईं, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को वास्तविक गति मिली।
अंतिम संदेश: समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
साल 2025 में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई सौदा नहीं होगा। सख्त नीति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और निर्णायक कार्रवाई ने भारत को वैश्विक सुरक्षा मंच पर एक भरोसेमंद और मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया।




