सीजी भास्कर, 28 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो वर्षों की लंबी जांच के बाद बड़ा खुलासा करते हुए विशेष अदालत में अंतिम आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
ईडी ने इस मामले में तीन शराब कंपनियों समेत अधिकारियों और कारोबारियों की कुल 382 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की है। एजेंसी का दावा है कि यह छत्तीसगढ़ शराब घोटाला (Chhattisgarh Liquor Scam) आने वाले समय में 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
ईडी के अनुसार भाटिया वाइन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरी और वेलकम डिस्टलरी की करीब 68 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई है। इसके अलावा तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 31 आबकारी अधिकारियों की लगभग 38 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। चार्जशीट में कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 22 लोग पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
चार्जशीट में 59 नए आरोपितों के नाम जोड़े गए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रहीं सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा, कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू, एफएल-10 लाइसेंस धारक, डिस्टिलरी संचालक और कई आबकारी अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और करीब 900 गवाहों के बयान को आधार बनाया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए एक संगठित सिंडिकेट बनाया गया था, जिसमें अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया की प्रमुख भूमिका बताई गई है।
आरोप है कि इस सिंडिकेट ने अधिकारियों की पोस्टिंग कराई, आबकारी नीति में बदलाव करवाया और फिर अवैध वसूली का नेटवर्क खड़ा किया। ईडी का दावा है कि इस पूरे तंत्र में चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू की भी अहम भूमिका रही और उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपये तक मिलने की बात सामने आई है।
ईडी और ईओडब्ल्यू के अनुसार घोटाले की बड़ी रकम हवाला के जरिए विदेश भेजी गई। दुबई, नीदरलैंड और लंदन में रिश्तेदारों के नाम पर निवेश के साक्ष्य भी मिले हैं। एजेंसियों का मानना है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाला (Chhattisgarh Liquor Scam) देश के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक बन सकता है और इसका ट्रायल लंबा व जटिल होने की संभावना है।


