सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। भारत-चीन संबंधों के संवेदनशील अध्याय गलवान घाटी पर आधारित सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) का टीजर रिलीज होते ही सरहद पार चीन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। भारत में जहां इस टीजर को शहीद कर्नल बिक्कुमाला संतोष बाबू के अदम्य साहस और बलिदान की सिनेमाई झलक के रूप में देखा जा रहा है, वहीं चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने इसे राष्ट्रवादी भावना भड़काने वाला कदम बताते हुए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है।
चीन की इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि गलवान घाटी की घटना आज भी बीजिंग के लिए एक असहज सच बनी हुई है। बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) के टीजर में भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और बलिदान को जिस तरह दर्शाया गया है, उसने न केवल दर्शकों का ध्यान खींचा है बल्कि चीनी सत्ता प्रतिष्ठान को भी रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
ग्लोबल टाइम्स ने अपनी लंबी रिपोर्ट में दावा किया है कि कोई भी “सिनेमैटिक क्रिएटिविटी” इतिहास को फिर से नहीं लिख सकती और न ही चीन की संप्रभुता की रक्षा के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के संकल्प को कमजोर कर सकती है। अखबार ने यह भी कहा कि फिल्म में दिखाई गई कहानी बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई है और इसका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
रिपोर्ट में सलमान खान का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्हें चीनी दर्शक बजरंगी भाईजान के अभिनेता के तौर पर जानते हैं, लेकिन चीनी सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हें ऐसे किरदार निभाने के लिए ट्रोल किया जाता है, जिन्हें “ओवर-द-टॉप”, अत्यधिक भावनात्मक और वास्तविकता से दूर बताया जाता है। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) भी उसी श्रेणी की फिल्म है, जिसमें दृश्य प्रभाव और नाटकीयता तथ्यों पर हावी दिखाई देती है।
चीन को सबसे ज्यादा चुभन इस बात से हुई है कि फिल्म में सलमान खान कर्नल बिक्कुमाला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें भारत में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष का नायक माना जाता है। अखबार ने तंज कसते हुए लिखा कि भारतीय मीडिया ने उनकी भूमिका को “तथाकथित” रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। यहां तक कि कुछ चीनी नेटिज़न्स ने टीजर के एक दृश्य की तुलना गेम ऑफ थ्रोन्स के एक सीन से करते हुए कॉपी का आरोप तक लगा दिया।
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने कई प्रतिक्रियाएं भी प्रकाशित की हैं। “किंगनिंग रियू v” नाम के यूजर ने टिप्पणी की कि भारतीय फिल्म तथ्यों से कोसों दूर है, जबकि “सितुका 98” नाम के यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा—“जब इतिहास कम पड़ जाता है, तो बॉलीवुड आगे आ जाता है।” इन टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) ने चीन में भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
अखबार ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से यह पुराना दावा दोहराया कि गलवान घाटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के चीनी हिस्से में स्थित है और चीनी सैनिक वर्षों से वहां गश्त करते रहे हैं। इसके साथ ही भारत पर अप्रैल 2020 से एकतरफा तौर पर सड़क, पुल और अन्य ढांचे बनाने का आरोप लगाया गया है। चीन का कहना है कि उसने कई बार आपत्ति जताई, लेकिन भारत ने कथित तौर पर LAC पार कर उकसावे वाली गतिविधियां जारी रखीं।
चीनी सैन्य विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा कि भारत का फिल्मों के जरिए राष्ट्रवादी भावना को भड़काना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड लंबे समय से राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश देने का माध्यम रहा है। हालांकि, उनके अनुसार, कोई भी फिल्म गलवान घाटी की “मूल सच्चाई” नहीं बदल सकती और बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) भी इसका अपवाद नहीं है।
सॉन्ग ने दावा किया कि गलवान संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने पहले सीमा पार की थी और PLA ने कानून के तहत अपने क्षेत्र की रक्षा की। उन्होंने चीनी अधिकारियों क्यूई फाबाओ और चेन होंगजुन की बहादुरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना चीनी समाज में राष्ट्रीय संप्रभुता और सैन्य इच्छाशक्ति का प्रतीक बन चुकी है।
वास्तविकता यह है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया। मई 2020 से चले आ रहे तनाव के बीच 15-16 जून की रात पैट्रोलिंग पॉइंट-14 पर डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के दौरान चीनी सैनिकों ने अचानक हमला किया। इस झड़प में बंदूकों का नहीं, बल्कि लोहे की छड़ों, पत्थरों और कीलदार डंडों का इस्तेमाल हुआ।
इस संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए, जिनमें कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। भारत ने अपने नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया, जबकि चीन ने लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी और बाद में केवल चार सैनिकों की मौत की बात मानी। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में हालांकि चीनी पक्ष को कहीं अधिक नुकसान होने का अनुमान लगाया गया।
आज जब बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galvan) 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने की तैयारी में है, तब उसका टीजर ही चीन की बेचैनी उजागर करने के लिए काफी साबित हुआ है। यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि उस संघर्ष की स्मृति है जिसने भारत-चीन सीमा विवाद को नई वैश्विक पहचान दी और शहीदों के बलिदान को इतिहास में अमर कर दिया।




