सीजी भास्कर 30 दिसम्बर भारत ने अपनी सामरिक समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। देश की चौथी परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* ने समुद्री परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह पनडुब्बी हाल ही में विशाखापत्तनम स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर से समुद्र में उतारी गई, जिसके बाद इसे ट्रायल फेज़ में भेजा गया।
(S4 Nuclear Submarine Sea Trials) को भारत की परमाणु प्रतिरोध क्षमता के लिए एक निर्णायक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
अरिहंत श्रेणी की सबसे उन्नत पनडुब्बी
करीब 7,000 टन वजनी S4* अरिहंत क्लास की आखिरी पनडुब्बी मानी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र की गहराइयों से परमाणु जवाब देने की भारत की क्षमता को और अधिक विश्वसनीय बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पनडुब्बी लंबे समय तक बिना सतह पर आए गश्त करने में सक्षम होगी, जिससे रणनीतिक स्तर पर देश को बड़ी बढ़त मिलेगी।
(Indian SSBN Capability) के लिहाज से S4* एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
80 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से बनी शक्ति
S4* की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशी स्वरूप है। इस पनडुब्बी में इस्तेमाल किए गए उपकरणों और प्रणालियों में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देश में विकसित तकनीक का है। यह अब तक बनी अरिहंत क्लास की पनडुब्बियों में सबसे ज्यादा स्वदेशी कंटेंट वाली इकाई मानी जा रही है।
(Make in India Defence) की दिशा में यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी निर्माण में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है।
K-4 मिसाइलों से लैस होगी समुद्री मारक क्षमता
तकनीकी रूप से S4* को आठ K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस किया जा सकता है। इन मिसाइलों की मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है, जिससे भारत समुद्र के भीतर रहते हुए भी दूरस्थ लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करने में सक्षम होगा।
(Sea Based Nuclear Deterrence) को मजबूत करने में यह क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएगी।
साल तक चल सकता है परीक्षण चरण
जानकारी के अनुसार, S4* के समुद्री परीक्षण एक से दो साल तक चल सकते हैं। इस दौरान रिएक्टर की स्थिरता, इंजन की दक्षता, पानी के भीतर हथियार प्रणालियों का परीक्षण और पूरे सिस्टम की सुरक्षा व विश्वसनीयता की गहन जांच की जाएगी। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो वर्ष 2027–28 के आसपास इसे औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल पनडुब्बी का नाम तय नहीं किया गया है, परंपरा के अनुसार सभी ट्रायल पूरे होने के बाद ही इसका नामकरण किया जाएगा।
समुद्री मोर्चे पर भारत की स्थिति और मजबूत
वर्तमान में भारत के पास कुल चार SSBN हैं, जिनमें से दो सक्रिय सेवा में हैं और दो परीक्षण चरण में हैं। तीसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन के 2026 के अंत तक कमीशन होने की संभावना है, जबकि उसके बाद S4* नौसेना के बेड़े में शामिल होगी।
(India Nuclear Submarine Fleet) के विस्तार से भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और अधिक मजबूत होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक सहारा मिलेगा।





