सीजी भास्कर, 30 दिसंबर | बांग्लादेश से एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ (Bangladesh Hindu Killing) हिंसा की गंभीर खबर सामने आई है। बांग्लादेश के मयमनसिंह जिला में 29 दिसंबर की शाम करीब 6 बजे 40 वर्षीय बिजेंद्र बिस्वास की हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, 22 साल के नोमान मियां ने धारदार हथियार से हमला किया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
बताया गया है कि बिजेंद्र और नोमान एक ही गारमेंट फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी जिले में 11 दिन पहले हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या हुई थी। बीते 12 दिनों में तीन हिंदुओं की हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
पहले भी मयमनसिंह में हुई थी नृशंस हत्या
18 दिसंबर को मयमनसिंह के भालुका इलाके में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या (Bangladesh Hindu Killing) कर दी गई थी। आरोप है कि बाद में उनके शव को फंदे से लटकाकर जलाया गया। दीपू पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुलिस ने अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने बयान जारी कर कहा था कि सरकार मृतक के परिवार—पत्नी, छोटे बच्चे और माता-पिता—की जिम्मेदारी उठाएगी।
राजबाड़ी में भीड़ हिंसा में युवक की मौत
हिंसा की एक और घटना राजबाड़ी जिला से सामने आई, जहां 24 दिसंबर को 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, स्थानीय लोगों ने अमृत पर जबरन वसूली का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामला उग्र हो गया और भीड़ हिंसा में तब्दील हो गया।
पांच दिन में सात हिंदू घरों में आगजनी
चटगांव के राउजान इलाके में पांच दिनों के भीतर सात हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई। पुलिस ने इस मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इस साल हिंसा में 184 मौतें: मानवाधिकार संगठन
हिंसा और आगजनी की इन घटनाओं से देश में भय (Bangladesh Hindu Killing) का माहौल है। 12 दिसंबर को ढाका में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को गोली मारी गई थी; सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उसी शाम भीड़ ने मीडिया संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के दफ्तरों में आगजनी की।
मानवाधिकार संगठन Ain o Salish Kendra के मुताबिक, 2025 में अब तक बांग्लादेश में हिंसा से 184 लोगों की मौत हो चुकी है। अंतरिम सरकार के कार्यालय ने बयान में कहा है कि आरोप या अफवाहों के बहाने हिंसा को किसी भी सूरत में मंजूरी नहीं दी जा सकती।





