सीजी भास्कर, 31 दिसंबर। छत्तीसगढ़ में शासकीय तंत्र की रफ्तार इन दिनों थमी (Government Employees Demands) हुई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर 29 से 31 दिसंबर तक जारी तीन दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन भी प्रदेशभर के सरकारी कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। दुर्ग जिले से लेकर भिलाई तक कलेक्ट्रेट, विभागीय कार्यालय और अधीनस्थ दफ्तरों में सन्नाटा पसरा नजर आया, जिससे आम नागरिकों को जरूरी कार्यों के लिए भटकना पड़ा।
धरना, प्रतीकात्मक विरोध और बंद दफ्तर
मंगलवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर ताले लटके रहे। अधिकांश विभागों में कर्मचारी अनुपस्थित रहे, वहीं कुछ नगरीय निकायों—खासतौर पर रायपुर नगर निगम—में कर्मचारियों ने काली पट्टी (Government Employees Demands) बांधकर काम किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे आंदोलन के साथ-साथ जनता की मूलभूत सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं करना चाहते, लेकिन लंबित मांगों पर सरकार का ध्यान खींचना भी उतना ही जरूरी है।
11 सूत्रीय मांगों ने पकड़ा जोर
हड़ताल के केंद्र में महंगाई भत्ता (DA), वेतन विसंगतियां, नियमितीकरण और पेंशन से जुड़े (Government Employees Demands) मुद्दे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू किया जाए और DA एरियर्स की राशि GPF खाते में समायोजित हो। इसके साथ ही चार स्तरीय समयमान वेतनमान, विभिन्न संवर्गों की वेतन असमानताओं का निराकरण और पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
संविदा और अनियमित कर्मियों की आवाज
आंदोलन के दौरान पंचायत सचिवों के शासकीयकरण, सहायक शिक्षकों व सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन और समयबद्ध पदोन्नति जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। अनुकंपा नियुक्ति नियमों में शिथिलीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने और दैनिक, अनियमित व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ठोस नीति की मांग ने आंदोलन को व्यापक समर्थन दिया है।
चेतावनी के साथ तीसरे दिन की तैयारी
फेडरेशन नेतृत्व का कहना है कि यदि सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो हड़ताल का तीसरा दिन भी पूरी ताकत के साथ (Government Employees Demands) जारी रहेगा। संकेत साफ हैं—सरकारी कामकाज पर असर और गहराने वाला है, और जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।


