सीजी भास्कर, 3 जनवरी। डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र में घायल तेंदुए की मौत (Injured Leopard Death Rajnandgaon) ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बताया जा रहा है कि तेंदुए के पैर में गंभीर चोट थी, जिसके चलते वह न तो शिकार कर पा रहा था और न ही नियमित रूप से भोजन कर पा रहा था। इलाज, रेस्क्यू और सतत निगरानी के अभाव में तेंदुआ धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया और अंततः उसकी प्राकृतिक मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेंदुए की मौत (Injured Leopard Death Rajnandgaon) के बाद कराई गई पीएम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण प्राकृतिक बताया गया है। वन अधिकारियों की मौजूदगी में तेंदुए का दाह संस्कार भी कर दिया गया, लेकिन पूरी कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता की कमी साफ नजर आई। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि तेंदुए की मौत के बाद बिना किसी विस्तृत जानकारी और सार्वजनिक स्पष्टीकरण के चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे वन विभाग की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र के लझोरी गांव में इसी तेंदुए (Injured Leopard Death Rajnandgaon) द्वारा एक ग्रामीण पर हमला किए जाने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना था और वन्यजीवों की निगरानी के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। इसके बावजूद घायल तेंदुए के इलाज, रेस्क्यू और संरक्षण को लेकर कोई ठोस और त्वरित व्यवस्था नहीं की गई, जो अब उसकी मौत का कारण मानी जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि तेंदुआ कई दिनों तक घायल अवस्था में क्षेत्र में भटकता रहा। यदि समय रहते उसे पकड़कर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि वन अमले को जानकारी देने के बावजूद हालात को गंभीरता से नहीं लिया गया। वहीं, विभागीय स्तर पर पूरे मामले को सामान्य बताने की कोशिश की जा रही है।
इस संबंध में डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी पूर्णिमा राजपूत ने कहा कि तेंदुए की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं। हालांकि, यह सवाल अब भी बना हुआ है कि घायल वन्यजीव के इलाज और निगरानी में समय पर प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। तेंदुए की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की तैयारियों, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


