सीजी भास्कर, 3 जनवरी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” के विजन को धरातल (Child Marriage Stopped Sukma) पर उतारते हुए सुकमा जिला प्रशासन ने एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। कलेक्टर अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन में प्रशासनिक अमले ने दुर्गम और पहुंचविहीन क्षेत्र में पहुंचकर न केवल एक 12 वर्षीय बालिका की शादी रुकवाई, बल्कि समाज को बाल विवाह के खिलाफ सख्त संदेश भी दिया ।
2 जनवरी की सुबह प्रशासन को सूचना मिली कि सुकमा (Child Marriage Stopped Sukma) विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर गांव नाड़ीगुफा में एक नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और सेक्टर सुपरवाइजर की संयुक्त टीम गठित की गई। गांव तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन था, जहां उफनते नदी-नालों और घने जंगलों को पार करना पड़ा, लेकिन टीम ने जोखिम की परवाह किए बिना पैदल यात्रा कर गांव तक पहुंच बनाई।
गांव पहुंचने पर अधिकारियों ने पाया कि स्थानीय परंपराओं के अनुसार विवाह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। प्रशासनिक टीम ने संवेदनशीलता और संयम के साथ परिजनों और ग्रामीणों से संवाद किया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी दंड और बालिका के भविष्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशासन की समझाइश का असर हुआ और परिजनों ने स्वेच्छा से बाल विवाह रोकने का निर्णय लिया।
इसके बाद ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार किया गया और बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। प्रशासन ने गांव के लोगों से भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की तुरंत सूचना देने की अपील भी की (Child Marriage Stopped Sukma)।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बालिका को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए परिजनों को प्रेरित किया। शासन की मंशा है कि राज्य की प्रत्येक पंचायत को “बाल विवाह मुक्त” (Child Marriage Stopped Sukma) घोषित किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके। यह कार्रवाई न केवल एक बालिका की जिंदगी बचाने का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इस पूरी कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर निशा साहू, सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो, काउंसलर लोकेश्वरी, चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर मल्लिका सोड़ी, केस वर्कर मुड़ा पोडियामी तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।


