सीजी भास्कर, 06 जनवरी। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को संतुलित बनाने की दिशा में एक बार फिर आयुर्वेदिक परंपरा को आगे बढ़ाया (Ayurvedic Immunity For Children) जा रहा है। शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय रायपुर के बालरोग विभाग में 6 जनवरी, मंगलवार को पुष्य नक्षत्र के अवसर पर स्वर्णप्राशन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाएगा।
आयुर्वेद में स्वर्णप्राशन को बच्चों की बौद्धिक क्षमता, रोग प्रतिरोधक शक्ति और बार-बार होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए उपयोगी माना जाता है। यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसमें स्वर्ण भस्म, शहद और औषधीय घी का विशेष मिश्रण तैयार (Ayurvedic Immunity For Children) किया जाता है। लंबे समय से यह पद्धति भारतीय चिकित्सा परंपरा का हिस्सा रही है और आज भी इसे नियमित रूप से अपनाया जा रहा है।
चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार, स्वर्णप्राशन कार्यक्रम प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र के दिन आयोजित किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ ले सकें। इस बार जनवरी माह में होने वाले आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं और बालरोग विभाग की टीम पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित करेगी।
स्वर्णप्राशन कराने के लिए बच्चों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ आधार कार्ड लेकर आना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद बच्चों का वजन और ऊंचाई दर्ज की जाएगी, इसके पश्चात कक्ष क्रमांक 10 में स्वर्णप्राशन कराया जाएगा। जनवरी 2026 के लिए आधार कार्ड के बिना रजिस्ट्रेशन मान्य नहीं होगा।
चिकित्सालय प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर पहुंचकर कतार में रहकर प्रक्रिया का पालन करें, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न (Ayurvedic Immunity For Children) हो सके। यह पहल न केवल आयुर्वेदिक परंपराओं को जीवंत रखती है, बल्कि बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता भी बढ़ाती है।


