सीजी भास्कर, 06 जनवरी। वैशाली नगर स्थित कालीबाड़ी प्रांगण में 5 से 18 जनवरी तक आयोजित 14 दिवसीय दिव्य प्रवचन (Divya Pravachan Bhilai) का शुभारंभ सोमवार को हुआ।
प्रथम दिवस दिव्य दार्शनिक वक्ता सुश्री श्रीश्वरी देवी ने “मैं कौन, मेरा कौन?” विषय पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए कहा कि केवल मनुष्य ही ऐसा जीव है जो ईश्वर को जानकर माया से पार जा सकता है।

प्रवचन के दौरान उन्होंने मानव देह के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए वेद, रामायण, पुराण, श्रीमद्भगवद्गीता एवं गुरुग्रंथ साहिब के उदाहरण प्रस्तुत किए।

उन्होंने कहा कि चौरासी लाख योनियों में केवल मनुष्य शरीर ही ऐसा है, जिसमें ज्ञान, विवेक और पुरुषार्थ की क्षमता निहित है। इसी कारण स्वर्ग के देवी-देवता भी मनुष्य शरीर को पाने की कामना करते हैं।
सुश्री श्रीश्वरी देवी (Divya Pravachan Bhilai) ने बताया कि मनुष्य शरीर से किए गए कर्मों का फल निश्चित रूप से प्राप्त होता है। अच्छे कर्म से स्वर्ग, बुरे कर्म से नर्क, कर्मों से ऊपर उठकर मोक्ष और भक्ति के माध्यम से परमानंद की प्राप्ति संभव है। जबकि अन्य योनियों में किए गए कर्मों का फल नहीं मिलता, इसलिए वहां जीव अपने जीवन लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता।

उन्होंने देवताओं के स्वरूप पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि देवता भी जीव ही हैं, जो पुण्य कर्मों के फलस्वरूप स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। किंतु पुण्य क्षीण होने पर उन्हें पुनः मृत्युलोक में आना पड़ता है। इसलिए केवल स्वर्ग की कामना ही अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकती।
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प्रवचन के अंत में उन्होंने मानव जीवन की नश्वरता को रेखांकित करते हुए कहा कि मनुष्य का शरीर पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर है। यह कब साथ छोड़ दे, इसका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए दुर्लभ मनुष्य शरीर प्राप्त होने पर आलस्य त्याग कर तुरंत जीवन के परम लक्ष्य भक्ति और आत्मबोध की ओर अग्रसर होना चाहिए, अन्यथा जीव को पशु, पक्षी, कीट-पतंग जैसी हीन योनियों में करोड़ों जन्मों तक भटकना पड़ सकता है।


