सीजी भास्कर, 7 जनवरी। ईमेल को अब तक निजी संवाद का सबसे सुरक्षित माध्यम माना (Disable Gmail Smart Features) जाता रहा है, लेकिन अब इसी भरोसे पर सवाल उठने लगे हैं। लाखों यूजर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले Google के Gmail को लेकर एक नया दावा सामने आया है, जिसने डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि Gmail में मौजूद कुछ AI आधारित स्मार्ट फीचर्स यूजर्स के ईमेल डेटा तक जरूरत से ज्यादा पहुंच बना सकते हैं।
Gmail को लेकर क्या है नया दावा
इंजीनियरिंग यूट्यूबर और टेक एक्सपर्ट Davery Jones ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, कई Gmail यूजर्स अनजाने में ऐसे फीचर्स के लिए पहले से ऑप्ट-इन हैं, जिनके जरिए ईमेल कंटेंट और अटैचमेंट्स तक AI सिस्टम की पहुंच हो सकती है। उनका दावा है कि यह डेटा AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जब तक कि यूजर खुद जाकर सेटिंग्स में बदलाव न करें।
कौन से Gmail फीचर्स बन रहे हैं चिंता की वजह
रिपोर्ट्स के अनुसार Gmail के Smart Features और Workspace Smart Features इस पूरे विवाद की जड़ हैं। इन्हीं फीचर्स के जरिए Ask Gemini, ईमेल समरी, स्मार्ट रिप्लाई और असिस्टेंट जैसे टूल काम (Disable Gmail Smart Features) करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये AI सुविधाएं सीधे इनबॉक्स के डेटा पर निर्भर करती हैं, जिससे निजी बातचीत की गोपनीयता पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर Gemini जैसे AI टूल्स को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
Gmail में Smart Features कैसे करें बंद
अगर आप अपनी प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहना चाहते हैं, तो Gmail की सेटिंग्स खुद चेक करना जरूरी है। डेस्कटॉप या लैपटॉप पर Gmail खोलें और See all settings पर जाएं। यहां Smart features on Gmail, Chat and Meet वाले विकल्प को अनचेक करें।
इसके बाद Manage Workspace smart feature settings में जाकर Google products और Google Workspace से जुड़े सभी स्मार्ट फीचर्स को भी बंद कर दें। ऐसा करने से Gmail में AI आधारित एक्सेस काफी हद तक सीमित हो जाता है।
Google का पक्ष क्या है
Google ने इन आरोपों को लेकर स्पष्ट किया है कि Gmail यूजर्स के ईमेल डेटा का इस्तेमाल AI ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाता। कंपनी का कहना है कि डेटा का उपयोग केवल फीचर्स को काम करने योग्य बनाने और प्रोसेसिंग के लिए (Disable Gmail Smart Features) होता है। हालांकि, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI फीचर्स जितने एडवांस हो रहे हैं, उतनी ही पारदर्शिता सेटिंग्स में भी होनी चाहिए, ताकि यूजर खुद तय कर सकें कि उनका डेटा कहां और कैसे इस्तेमाल हो रहा है।


