सीजी भास्कर, 09 जनवरी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू की गई APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) व्यवस्था में छत्तीसगढ़ ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो अब तक बड़े और संसाधन-संपन्न राज्यों (Chhattisgarh Education) के नाम रहा करता था। स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान के निर्माण की इस राष्ट्रीय मुहिम में छत्तीसगढ़ ने न केवल तेज़ रफ्तार पकड़ी, बल्कि प्रतिशत के लिहाज़ से देश के बड़े राज्यों में शीर्ष स्थान भी बना लिया है।
7 जनवरी 2026 तक राज्य के 57,045 शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत 57 लाख से अधिक विद्यार्थियों में से 50,60,941 छात्रों की अपार आईडी तैयार की जा चुकी है। कुल संख्या के हिसाब से यह 88.63 प्रतिशत कवरेज है, जो बड़े राज्यों की श्रेणी में सबसे अधिक मानी जा रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की मज़बूत नींव का संकेत है।
जिला रिपोर्ट कार्ड
राज्य के कई जिलों ने अपार आईडी निर्माण में मिसाल कायम की है। बेमेतरा जिले में 96.40 प्रतिशत और राजनांदगांव में 96.38 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी तैयार (Chhattisgarh Education) हो चुकी है। वहीं रायगढ़, कोरिया, रायपुर, कोरबा, धमतरी, दुर्ग और बलौदाबाजार जैसे जिलों में यह आंकड़ा 93 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है।
नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों वाले कुछ जिलों—जैसे नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर और दंतेवाड़ा—को छोड़ दिया जाए, तो शेष लगभग सभी जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
ग्राउंड लेवल पर तेज़ी
राज्य शासन के निर्देश पर शिक्षक, संकुल समन्वयक और शिक्षा अधिकारी गांव-गांव, स्कूल-स्कूल जाकर शेष विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने में जुटे हुए हैं। कई जगहों पर अभिभावकों को भी इस डिजिटल पहचान के फायदे समझाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी छात्र का नाम सूची से न छूटे।
31 जनवरी की डेडलाइन
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 जनवरी 2026 तक सभी विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जानी है। इसी समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में निगरानी, समीक्षा और फील्ड स्तर की सक्रियता लगातार बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि निर्धारित तारीख से पहले लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
क्या बदलेगा अपार आईडी से?
अपार आईडी के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक यूनिक और आजीवन मान्य डिजिटल अकादमिक पहचान (Chhattisgarh Education) मिलेगी। इसमें उनकी पढ़ाई का पूरा रिकॉर्ड, प्रमाण-पत्र, अंकतालिकाएं और क्रेडिट्स सुरक्षित रहेंगे। इससे न केवल स्कूल बदलना या आगे की पढ़ाई आसान होगी, बल्कि देशभर में शैक्षणिक मोबिलिटी और पारदर्शिता को भी मजबूती मिलेगी।


