सीजी भास्कर, 09 जनवरी। विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा एक प्रशासनिक फैसला इन दिनों तीखी बहस का कारण बना हुआ है। मंदिर प्रशासन द्वारा चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए 24 घंटे का शुल्क 500 रुपये तय किए जाने के बाद नाराजगी खुलकर सामने (Puri Jagannath Temple) आने लगी है।
यह शुल्क मंदिर के भक्त निवासों में ठहरने वाले श्रद्धालुओं पर लागू किया गया है, जिसे लेकर धार्मिक आस्था और आर्थिक दबाव के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अधिसूचना जारी होते ही इस फैसले के खिलाफ न सिर्फ श्रद्धालुओं, बल्कि राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।
प्रशासन का तर्क, लेकिन सवाल बरकरार
मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और सुविधाओं के रखरखाव के उद्देश्य से लिया गया है। तय शुल्क में 18 प्रतिशत जीएसटी (Puri Jagannath Temple) भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ती भीड़ और वाहनों की संख्या को देखते हुए एक संगठित व्यवस्था जरूरी हो गई थी। हालांकि, प्रशासन के इस तर्क से श्रद्धालु संतुष्ट नजर नहीं आ रहे।
बढ़ते विरोध के बाद बदले सुर
फैसले के खिलाफ माहौल गर्माने पर पुरी जिला कलेक्टर और मंदिर प्रशासन की उप मुख्य प्रशासक ने संकेत दिए हैं कि पार्किंग शुल्क पर पुनर्विचार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया ने बढ़ाया दबाव
पुरी से बीजेडी विधायक सुनील कुमार मोहंती ने मंदिर प्रशासन से यह फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब अधिकांश होटलों में ठहरने वाले मेहमानों से अलग से पार्किंग शुल्क (Puri Jagannath Temple) नहीं लिया जाता, तो फिर श्रद्धालुओं पर यह अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी, जिससे आम या गरीब श्रद्धालुओं पर आर्थिक दबाव पड़े।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने शुल्क को अनुचित करार देते हुए कहा कि यह फैसला श्रद्धालुओं की आस्था के साथ अन्याय है। वहीं बीजेडी के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा ने आरोप लगाया कि भक्त निवास पहले ही महंगे हैं और अब पार्किंग शुल्क बढ़ाकर श्रद्धालुओं से अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
श्रद्धालुओं की सीधी आपत्ति
स्थानीय निवासियों और नियमित रूप से पुरी आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि कई सार्वजनिक स्थानों और यहां तक कि हवाई अड्डों पर भी पार्किंग शुल्क इससे कम होता है। ऐसे में मंदिर परिसर में 500 रुपये की दर को अत्यधिक और अव्यवहारिक बताया जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मंदिर प्रशासन अपने फैसले में बदलाव करता है या विरोध के बावजूद यह नीति लागू रहती है।


