सीजी भास्कर, 13 जनवरी| दिल्ली में ट्यूबरकुलोसिस से जंग अब और तेज़ होने जा रही है। राजधानी की इंटरमीडिएट रेफरेंस लेबोरेटरी (IRL) ने एक ऐसा मुकाम हासिल (Delhi IRL CTD Certification) कर लिया है, जो सीधे तौर पर ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी मरीजों के इलाज की दिशा बदल देगा।
भारत सरकार के सेंट्रल ट्यूबरकुलोसिस डिवीजन (CTD) से मिला नया सर्टिफिकेशन दिल्ली को बेडाक्विलाइन और प्रेटोमेनिड जैसी आधुनिक दवाओं के लिए एडवांस्ड ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (DST) की आधिकारिक अनुमति देता है।
यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि ये दोनों दवाएं दुनिया भर में मल्टीड्रग और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी मरीजों के लिए लाइफ-सेविंग मानी जाती हैं। अब इन दवाओं की प्रभावशीलता की जांच दिल्ली में ही संभव होगी।
बाहर नहीं जाएंगे सैंपल, समय पर शुरू होगा इलाज
अब तक जिन मरीजों को एडवांस्ड DST की जरूरत होती थी, उनके सैंपल कई बार राज्य से बाहर भेजे जाते थे। इससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी और इलाज शुरू होने में भी वक्त (Delhi IRL CTD Certification) लग जाता था। नई मंजूरी के बाद यह प्रक्रिया दिल्ली में ही पूरी होगी, जिससे मरीजों को तेज़, सटीक और भरोसेमंद नतीजे मिल सकेंगे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सही दवा शुरू होना टीबी इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है, और यह सुविधा उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
क्या है एडवांस्ड DST?
एडवांस्ड ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग से यह पता चलता है कि टीबी का बैक्टीरिया किन दवाओं पर असरदार प्रतिक्रिया दे रहा है और किन पर नहीं। इससे इलाज को मरीज के अनुसार तय किया जा सकता है, जिससे सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस देश की अग्रणी लैब
दिल्ली की IRL लैब पहले से ही हाई-एंड डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जानी जाती है। यहां BSL-3 लैब सुविधा के साथ MGIT 960, लाइन प्रोब ऐसे (LPA), Xpert XDR, ट्रूनेट, पैथोडिटेक्ट, रियल-टाइम PCR और होल जीनोम सीक्वेंसिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये सभी प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप टीबी की सटीक जांच सुनिश्चित करते हैं।
साल 2025 में ही इस लैब में 30 हजार से अधिक सैंपल प्रोसेस किए गए, जो राजधानी में टीबी नियंत्रण की रीढ़ बन चुकी इस व्यवस्था को दर्शाता है।
BPaLM रेजिमेन क्यों है खास?
WHO द्वारा सुझाया गया BPaLM रेजिमेन कम समय में ज्यादा असरदार इलाज देता है। इसमें इलाज की सफलता दर अधिक और मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम पाई गई है। दिल्ली में अब तक 1000 से अधिक ड्रग-रेसिस्टेंट मरीज इस नए इलाज से जोड़े जा चुके हैं।
एक्टिव केस फाइंडिंग से पकड़ में आ रहे नए मरीज
दिल्ली सरकार हाई-रिस्क और सघन आबादी वाले इलाकों में एक्टिव केस फाइंडिंग (ACF) अभियान को लगातार विस्तार (Delhi IRL CTD Certification) दे रही है। रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्टिंग के जरिए टीबी और ड्रग रेजिस्टेंस की पहचान शुरुआती चरण में ही हो रही है, जिससे इलाज तुरंत शुरू किया जा रहा है और मरीजों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित हो पा रही है।
टीबी मुक्त दिल्ली की ओर मजबूत कदम
राजधानी में पब्लिक हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने की यह पहल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का फोकस साफ है—टीबी को केवल नियंत्रित नहीं, बल्कि जड़ से खत्म करना।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस उपलब्धि को टीबी उन्मूलन की दिशा में “निर्णायक मोड़” बताया। उनका कहना है कि दिल्ली में ही एडवांस्ड DST की सुविधा मिलने से मरीजों को समय पर सही इलाज मिलेगा और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर कदम और तेज़ होंगे।
बदलता इलाज, बदलती तस्वीर
नई ड्रग टेस्टिंग क्षमता, आधुनिक इलाज पद्धतियों का विस्तार और जमीनी स्तर पर तेज़ होती खोज—ये तीनों मिलकर दिल्ली में टीबी से निपटने के पूरे मॉडल को बदल रहे हैं। आने वाले वर्षों में इसका असर न सिर्फ राजधानी, बल्कि देशभर के टीबी उन्मूलन प्रयासों पर दिखाई देगा।


