सीजी भास्कर, 16 जनवरी। डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कमजोरी महसूस होना पूरी तरह स्वाभाविक (Post Delivery Care) प्रक्रिया है, क्योंकि इस समय शरीर हार्मोनल बदलाव, गर्भाशय के सिकुड़ने, आफ्टर डिलीवरी पीरियड साइकिल और अंदरूनी रिकवरी जैसे कई चरणों से गुजर रहा होता है,
जिसे सामान्य होने में कई हफ्तों का समय लग सकता है। डॉक्टरों के अनुसार इस दौर में शारीरिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही आगे चलकर लंबे समय तक थकान, दर्द और अन्य समस्याओं की वजह बन सकती है।
दादी-नानी के समय से चली आ रही ठंड से बचने की सलाह आज भी काफी हद तक सही (Post Delivery Care) मानी जाती है,
इसलिए डिलीवरी के बाद नंगे पैर ठंडी फर्श पर चलने से बचना चाहिए और शरीर को पर्याप्त आराम व गर्माहट देना जरूरी है। गुनगुना पानी पीना पाचन और शरीर की रिकवरी के लिए फायदेमंद होता है,
हालांकि बहुत ज्यादा गर्म पानी नुकसानदायक हो सकता है। नहाने के बाद सिर पर कपड़ा बांधकर रखने की परंपरा भी पूरी तरह गलत नहीं है, क्योंकि इससे सर्दी-जुकाम से बचाव होता है, लेकिन हर समय सिर ढककर रखना जरूरी नहीं माना जाता और ठंडी हवा में बाहर निकलते समय सिर ढकना पर्याप्त होता है।
इसी तरह एसी या पंखे का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की जरूरत (Post Delivery Care) नहीं होती, बस कमरे का तापमान संतुलित रखना चाहिए, जो लगभग 27 से 28 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त माना जाता है। खानपान को लेकर डॉक्टरों की राय है कि नई मां को सुपाच्य, पोषक तत्वों से भरपूर और ताकत देने वाला आहार लेना चाहिए,
जबकि जरूरत से ज्यादा तेल, घी और मसालेदार भारी भोजन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि दादी-नानी के कई घरेलू सुझाव अनुभव पर आधारित (Post Delivery Care) होते हैं और सही भी हो सकते हैं, लेकिन हर सलाह को बिना समझे अपनाना ठीक नहीं है, इसलिए डिलीवरी के बाद आहार, दिनचर्या और देखभाल को लेकर महिला की मेडिकल स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर और सुरक्षित तरीका माना जाता है।


