सीजी भास्कर, 16 जनवरी। दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में अब इलाज की तस्वीर बदलने लगी है। वर्षों से घुटने के दर्द के साथ (Knee Replacement Surgery) जी रहीं एक आदिवासी महिला के लिए यह सिर्फ ऑपरेशन नहीं था, बल्कि एक नई शुरुआत थी। जिला अस्पताल दंतेवाड़ा में पहली बार अत्याधुनिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, जिसने यह साबित कर दिया कि गंभीर इलाज के लिए अब बड़े शहरों की मजबूरी धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
कुआकोंडा विकासखंड के महारापारा की रहने वाली 45 वर्षीय शांति रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लगातार संघर्ष कर रही थीं। साप्ताहिक हाट में चूड़ियों की छोटी-सी दुकान ही उनकी आमदनी का सहारा थी, लेकिन दाएं घुटने के तेज़ और लगातार दर्द ने न सिर्फ उनका काम छीना, बल्कि आत्मविश्वास भी डगमगा दिया। चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया था।
जिला अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित पाया। 6 जनवरी को भर्ती करने के बाद 13 जनवरी को उनका टोटल नी रिप्लेसमेंट (Knee Replacement Surgery) किया गया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही। ऑपरेशन के बाद जब शांति पहली बार बिना दर्द के खड़ी हुईं, तो उनकी आंखों में राहत साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा— “पहले हर कदम डर और दर्द से भरा होता था, अब चलने का भरोसा लौटा है।”
ऑपरेशन करने वाली ऑर्थोपेडिक टीम के अनुसार, इस प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त घुटने के जोड़ को आधुनिक कृत्रिम इम्प्लांट से बदला जाता है, जिससे लंबे समय से चला आ रहा दर्द समाप्त होता है और सामान्य गतिविधियां दोबारा संभव हो पाती हैं।
आयुष्मान योजना ने दिया आर्थिक संबल
इस पूरे इलाज की सबसे अहम बात यह रही कि सर्जरी का संपूर्ण खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया गया। मरीज को अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा। शांति ने सरकार और अस्पताल प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अगर यह सुविधा जिले में न होती, तो इलाज उनके लिए सपना ही रह जाता।
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि
वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल जिले में इस स्तर की सर्जरी का सफल होना सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक मील (Knee Replacement Surgery) का पत्थर है। प्रशिक्षित सर्जन, सशक्त एनेस्थीसिया सपोर्ट, अनुभवी नर्सिंग स्टाफ और बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल—इन सभी की सामूहिक मेहनत ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत यह सुविधा आगे भी पात्र मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक कमजोरी किसी के इलाज में बाधा न बने।
दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल सफलता नहीं है—यह भरोसे की जीत है, जो यह संदेश देती है कि अब बेहतर इलाज गांव और जिले की चौखट तक पहुंचने लगा है।
क्यों खास है यह सर्जरी?
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में पहली टोटल नी रिप्लेसमेंट
आदिवासी महिला को मिला अत्याधुनिक इलाज
बड़े शहरों पर निर्भरता कम होने का संकेत
योजना का लाभ
आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा खर्च कवर
मरीज को शून्य आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पतालों में भरोसा मजबूत


