सीजी भास्कर, 16 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले (Supreme Court Hearing Deferred) से जुड़े मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई स्थगित कर दी। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली तारीख तय करने का संकेत दिया है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलीलें रखीं, जबकि चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष प्रस्तुत किया।
राज्य सरकार की ओर से पेश महेश जेठमलानी ने अदालत में कहा कि चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले के एक प्रमुख आरोपी हैं और इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड में से एक माने जाते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस मामले की प्रकृति गंभीर है और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिन्हें देखते हुए जमानत दिए जाने के आदेश पर पुनर्विचार आवश्यक है।
वहीं, चैतन्य बघेल का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस मामले में सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक सुविचारित आदेश पारित किया है। उन्होंने दलील दी कि इस मामले की जांच पिछले दो वर्षों से जारी है और अभियोजन एजेंसियों के पास जांच के लिए पर्याप्त समय रहा है, इसके बावजूद कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है जो जमानत रद्द करने को उचित ठहराए।
गौरतलब है कि 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में चैतन्य बघेल (Supreme Court Hearing Deferred) को जमानत दी थी। हाई कोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एक मामले और छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) एवं आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज दूसरे मामले में जमानत याचिकाओं को स्वीकार किया था।
हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई स्थगित किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


