सीजी भास्कर, 16 जनवरी। धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बताने वाले सरकारी दावों की पोल उस समय खुल गई जब मुंगेली जिले में कस्टम मिलिंग (Custom Milling Scam) के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। राज्य आईसीसीसी से मिले अलर्ट और मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन को मजबूरन छापामार कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें 14 राइस मिलों को सील किया गया और 12 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया।
कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय तथा राजस्व, पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने जिले की विभिन्न राइस मिलों में अचानक दबिश दी। जांच के दौरान ओवरलोडिंग, रिसायक्लिंग और कस्टम मिलिंग में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे यह साफ हो गया कि धान खरीदी की पूरी व्यवस्था लंबे समय से लापरवाही और मिलीभगत के भरोसे चल रही थी।
इन मिलों में उजागर हुई गड़बड़ी
जांच के बाद उपलेटा राइस मिल, नवागांव घुठेरा रोड स्थित नेशनल दाल मिल, पंडरिया रोड स्थित वर्धमान मिलिंग इंडस्ट्रीज, जैन राइस इंडस्ट्रीज और नवकार दाल उद्योग में कस्टम मिलिंग में भारी अनियमितताएं पाई गईं। इन मिलों से 12 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया। वहीं नवागढ़ रोड स्थित दीपक राइस इंडस्ट्रीज और दीपक मिलिंग इंडस्ट्रीज में 198 क्विंटल से अधिक धान की कमी मिली, जबकि लोरमी रोड स्थित एसएस फूड में 1761 क्विंटल से अधिक धान गायब पाया गया।
जिला खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना ने बताया कि छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कुल 19 राइस मिलों पर कार्रवाई की जा रही है, जिनमें से 14 राइस मिलों को सील कर दिया गया है। सवाल यह उठता है कि जब व्यवस्था इतनी सख्त थी, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे चलती रही?
आईसीसीसी निगरानी या कागजी सख्ती?
राज्य शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान उठाव और परिवहन की निगरानी के लिए आईसीसीसी कमांड सेंटर गठित किया गया है। इसके तहत धान परिवहन में लगे वाहनों को जीपीएस से ट्रैक किया जा रहा है। वाहन यदि तय समय से अधिक एक स्थान पर रुकते हैं, मार्ग बदलते हैं या क्षमता से अधिक धान ले जाते हैं, तो इसका अलर्ट पोर्टल पर दिखता है।
लेकिन सवाल यह है कि जब (Custom Milling Scam) जैसे मामलों में हजारों क्विंटल धान की हेराफेरी हो गई, तब यह निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी? क्या कार्रवाई केवल अलर्ट मिलने के बाद ही होगी, या फिर पहले से चल रही अनियमितताओं पर जानबूझकर आंखें मूंदी गई थीं?
सरकारी दावों पर उठते सवाल
जिला प्रशासन अब सीमाओं और चेक पोस्ट पर निगरानी बढ़ाने, रात्रिकालीन गश्त और संदिग्ध वाहनों की जांच की बात कर रहा है। कोचियों और बिचौलियों के जरिए अवैध धान खपाने पर रोक के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं। लेकिन यह कार्रवाई बताती है कि सिस्टम तब हरकत में आता है, जब गड़बड़ी उजागर हो जाती है।
इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि कस्टम मिलिंग और धान खरीदी व्यवस्था में सुधार के सरकारी दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी सुधार लाएगी, या फिर कुछ दिनों बाद सिस्टम फिर उसी ढर्रे पर लौट आएगा।


