सीजी भास्कर, 16 जनवरी। भोपाल-इंदौर मार्ग पर स्थित फंदा टोल प्लाजा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गुरुवार रात ड्यूटी के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में टोल कर्मचारी विजय मेवाड़ा की ट्रक की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि टोल प्लाजा पर सुरक्षा मानकों और सरकारी निगरानी की गंभीर लापरवाही (Toll Plaza Accident) को उजागर करता है।
मृतक विजय मेवाड़ा, निवासी खालमिया (सीहोर), फंदा टोल प्लाजा पर कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10 बजे विजय टोल बूथ के पास डिवाइडर पर खड़ा था। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह सड़क पर गिर पड़ा और तभी वहां से गुजर रहे एक तेज रफ्तार ट्रक के अगले पहिए की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भयावह थी कि विजय की मौके पर ही मौत हो गई।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टोल प्लाजा जैसे हाई-रिस्क जोन में कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आखिर क्यों नहीं हैं? न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग, न सेफ्टी गियर और न ही भारी वाहनों की गति पर प्रभावी नियंत्रण। यह घटना (Government Negligence) की ओर इशारा करती है, जहां टोल संचालन तो निजी हाथों में है, लेकिन निगरानी की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों की भी बनती है।
30 लाख की मांग, 7 लाख पर बनी सहमति
हादसे के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने स्पष्ट कहा कि विजय की मौत ऑन-ड्यूटी हुई है, इसलिए टोल कंपनी को उसकी जिम्मेदारी लेते हुए उचित मुआवजा देना चाहिए। परिजनों ने 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग रखी।
मुआवजे को लेकर टोल प्रबंधन और परिजनों के बीच काफी देर तक गहमागहमी और तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस की मौजूदगी में हुई लंबी बातचीत के बाद टोल संचालक द्वारा 7 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी। हालांकि परिजन इस राशि को अपर्याप्त बताते रहे और टोल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते रहे।
पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने संबंधित ट्रक को जब्त कर लिया है और टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हादसे के पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।
विजय मेवाड़ा की मौत से उसके पैतृक गांव खालमिया में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते टोल प्लाजा पर सुरक्षा मानकों का पालन कराया गया होता, तो आज एक परिवार का सहारा यूं नहीं छिनता।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या टोल प्लाजा केवल राजस्व वसूली के केंद्र बनकर रह गए हैं और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जान की कीमत मुआवजे की सौदेबाजी तक ही सीमित रह गई है।


