सीजी भास्कर, 16 जनवरी। राजधानी रायपुर के एक निजी होटल से गिरफ्तार की गई उज्बेकिस्तान (Foreign Girls Detained in Raipur) की विदेशी युवतियों को आखिरकार डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन दिन तक आईबी और पुलिस की गहन पूछताछ के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये युवतियां रायपुर क्यों आई थीं और किससे मिलने वाली थीं। पूरा मामला सरकारी एजेंसियों की चुप्पी और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विदेशी युवतियों (Foreign Girls Detained in Raipur) को आईबी अधिकारियों ने तीन दिनों तक पूछताछ के लिए अपने पास रखा। इसके बाद गुरुवार, 15 जनवरी को उन्हें डिटेंशन सेंटर रवाना कर दिया गया। लेकिन इस दौरान न तो पुलिस और न ही किसी अन्य एजेंसी ने यह बताया कि पूछताछ में क्या निष्कर्ष निकला।
कई सवाल, लेकिन जवाब नहीं
मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है।
विदेशी युवतियां कौन थीं?
वे रायपुर कब और कैसे पहुंचीं?
किससे संपर्क में थीं और यहां किस उद्देश्य से आई थीं?
इन तमाम अहम सवालों पर पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और सीनियर अफसरों के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन (Government Silence) के कारण संदेह और गहराता जा रहा है।
पहले रूसी, फिर किर्गिस्तान, अब उज्बेकिस्तान
10 जनवरी को तेलीबांधा पुलिस द्वारा विदेशी युवतियों की गिरफ्तारी के बाद पहले रूसी युवतियों के पकड़े जाने की चर्चा सामने आई। बाद में पुलिस सूत्रों ने बताया कि आईबी और सीनियर पुलिस अधिकारी किर्गिस्तान की दो युवतियों से पूछताछ कर रहे हैं। अब इन्हें उज्बेकिस्तान की युवतियां बताया जा रहा है।
देश और पहचान को लेकर इस तरह का भ्रम खुद जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
वीजा खत्म, दस्तावेज नदारद
जांच में सामने आया कि एक युवती का वीजा समाप्त हो चुका था, जबकि दूसरी युवती के पास पासपोर्ट और वैध दस्तावेज ही नहीं थे। पुलिस अधिकारियों ने पहले कहा था कि पूछताछ पूरी होने के बाद जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन दो से तीन दिन की पूछताछ के बाद भी बिना कोई विवरण दिए युवतियों को डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।
पुलिस ने क्या कहा
रायपुर एएसपी तारकेश्वर पटेल ने विदेशी युवतियों (Foreign Girls Detained in Raipur) को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि युवतियों को पूछताछ के लिए लाया गया था और उनके वीजा व पासपोर्ट में खामियां पाई गईं, इसलिए नियमानुसार उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया है। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि वे किन गतिविधियों में शामिल थीं या जांच में क्या सामने आया।
पुराना मामला, नए संदेह
यह पहला मामला नहीं है। करीब 11 महीने पहले, 6 फरवरी 2025 को भी रायपुर में एक विदेशी युवती और उसका साथी शराब के नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाते हुए हादसे का कारण बने थे। उस मामले की जांच में बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ था। ऐसे में मौजूदा प्रकरण को लेकर भी आशंकाएं और सवाल और गहरे हो गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी जैसे संवेदनशील शहर में बार-बार विदेशी युवतियों की मौजूदगी और फिर आधी-अधूरी जानकारी के साथ मामलों को दबा देना, सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में आगे कोई ठोस खुलासा होगा या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


