सीजी भास्कर, 16 जनवरी | Bijapur Bulldozer Action : बीजापुर में न्यू बस स्टैंड के पीछे अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब मानवीय संकट का रूप लेती जा रही है। प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान में अब तक करीब 40 मकानों को जमींदोज किया जा चुका है, जबकि मौके पर मौजूद परिवारों के सामने रहने का कोई ठोस विकल्प नहीं दिख रहा।
इस कार्रवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) में पदस्थ एक जवान, जो उस समय ड्यूटी पर था, उसका घर भी बुलडोजर की चपेट में आ गया। घर में मौजूद उसकी पत्नी का कहना है कि वे वर्ष 2006 से इसी जगह रह रहे हैं और उनके गांव में कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।
कार्रवाई के दौरान कई महिलाओं की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कोई बच्चों को गोद में लिए खड़ी थी, तो कोई टूटे मकान के मलबे में सामान तलाशती दिखी। महिलाओं का एक ही सवाल था—“अब हम कहां जाएंगे?” यह दृश्य पूरे इलाके में संवेदनशील माहौल पैदा कर रहा है।
नक्सल डर की दहशत
पीड़ित गंगा माड़वी ने बताया कि वे पिछले चार साल से अपने परिवार के साथ यहां रह रहे थे। नक्सली हिंसा के कारण उन्हें गांव छोड़ना पड़ा था। प्रशासनिक बातचीत के बाद उन्होंने यहां घर बनाया और नियमित रूप से टैक्स भी जमा किया। उनका कहना है कि गांव लौटे तो जान का खतरा है 。
गंगा माड़वी के अनुसार, तीन महीने पहले उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला था, जिस पर मामला न्यायालय में लंबित है। उन्हें यह भरोसा भी दिया गया था कि अंतिम निर्णय तक मकान नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन अचानक कार्रवाई शुरू होने से परिवार पूरी तरह असहाय हो गया।
कार्रवाई के दौरान नगरपालिका, तहसील प्रशासन और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में कुल 55 मकान चिन्हित किए गए हैं, जिन पर कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद शांति नगर क्षेत्र में स्थित करीब 20 मकानों पर भी बुलडोजर चलाया जाएगा。
फिलहाल कार्रवाई जारी है, लेकिन विस्थापित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सुरक्षा कारणों से गांव छोड़ चुके इन लोगों के पास अब सुरक्षित जीवन का रास्ता क्या होगा।


