सीजी भास्कर, 17 जनवरी | Javed Akhtar Controversy की चर्चा जितनी उनके बयानों को लेकर होती है, उतनी ही उनकी कलम की ताकत को लेकर भी। 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में जन्मे जावेद अख्तर का असली नाम ‘जादू’ था। साहित्यिक माहौल में पले-बढ़े जावेद ने बहुत कम उम्र में सिनेमा की दुनिया में कदम रखा और अपनी अलग पहचान बनाई।
बॉलीवुड में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर शुरुआत करने वाले जावेद अख्तर ने बाद में शब्दों से इतिहास रच दिया। दीवार, शोले, डॉन, मिस्टर इंडिया जैसी फिल्मों की कहानियां और डायलॉग आज भी सिनेमा प्रेमियों की ज़ुबान पर हैं। यही वजह है कि Javed Akhtar Controversy के साथ-साथ उनका रचनात्मक योगदान भी बराबर चर्चा में रहता है।
जावेद अख्तर के नाम 5 नेशनल अवॉर्ड और 16 फिल्मफेयर अवॉर्ड दर्ज हैं। साज, बॉर्डर, गॉडमदर, रिफ्यूजी और लगान जैसे प्रोजेक्ट्स ने उन्हें गीतकार के तौर पर अलग मुकाम दिलाया। इसके अलावा पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी उनकी उपलब्धियों की गवाही देते हैं।
निजी जीवन की बात करें तो जावेद अख्तर की पहली शादी हनी ईरानी से हुई, जिनसे फरहान अख्तर और जोया अख्तर का जन्म हुआ। बाद में उनका तलाक हुआ और फिर उन्होंने शबाना आज़मी से विवाह किया। पारिवारिक जीवन में संतुलन और मतभेद, दोनों उनकी कहानी का हिस्सा रहे।
Javed Akhtar Controversy का बड़ा अध्याय तब सामने आया जब उन्होंने बुर्का और घूंघट प्रथा पर खुलकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चेहरे को ढंकना व्यक्तिगत पसंद से ज्यादा सामाजिक दबाव का नतीजा है, जिस पर अलग-अलग वर्गों से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा की तुलना तालिबान की सोच से की। इस बयान के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया।
लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर की गई टिप्पणी ने भी Javed Akhtar Controversy को नया मोड़ दिया। उन्होंने इसे शोर प्रदूषण से जोड़ते हुए सीमाओं की बात कही, जिस पर धार्मिक और सामाजिक संगठनों की नाराज़गी सामने आई।
धर्म को लेकर जावेद अख्तर का नजरिया हमेशा मुखर रहा है। उन्होंने कई बार कहा कि धर्म ने इंसान को डर के जरिए नियंत्रित किया है। धार्मिक ग्रंथों को अंतिम सत्य न मानने की बात ने उन्हें आलोचनाओं के केंद्र में ला दिया।
अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनका कानूनी टकराव भी काफी चर्चा में रहा। सुशांत सिंह राजपूत मामले में नाम जोड़ने को लेकर जावेद अख्तर ने मानहानि का केस किया, जो कई साल बाद आपसी सहमति से सुलझा।
Javed Akhtar Controversy के बावजूद यह सच है कि उनकी रचनात्मक विरासत हिंदी सिनेमा में अमिट है। जहां एक ओर उनकी कलम ने पीढ़ियों को प्रभावित किया, वहीं उनके बेबाक विचारों ने उन्हें हमेशा चर्चा के केंद्र में बनाए रखा।




