सीजी भास्कर, 19 जनवरी | छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं दिखेगा, लेकिन इसके बाद तीन दिनों तक रात का पारा 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना जताई गई है। मौसम के जानकारों के अनुसार यह बदलाव (Chhattisgarh Cold Wave Update) के तौर पर देखा जा रहा है, जहां दिन में हल्की गर्माहट और सुबह-रात में ठंड का असर बना रहेगा।
उत्तर और मध्य भारत से आ रही ठंडी हवा
बीते 24 घंटों में रायपुर और दुर्ग संभाग के कुछ हिस्सों में शीतलहर जैसे हालात दर्ज किए गए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और मध्य भारत के ऊपर एक साथ सक्रिय तीन सिनॉप्टिक सिस्टम हवा के रुख और तापमान को प्रभावित कर रहे हैं। यही वजह है कि ठंडी हवाएं धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रही हैं, जिसे (North India Cold Air) का प्रभाव माना जा रहा है।
तापमान के आंकड़े क्या कह रहे हैं
पिछले एक दिन के तापमान पर नजर डालें तो प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस जांजगीर में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ। ये आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि रात की ठंड अब और गहराने वाली है।
तीन सिनॉप्टिक सिस्टम कैसे बढ़ा रहे ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस पूरे बदलाव के पीछे तीन अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए सिस्टम काम कर रहे हैं।
पहला, दक्षिण पाकिस्तान के ऊपर बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन, जिससे ऊपरी वायुमंडल में हलचल बढ़ी है।
दूसरा, ऊपरी और मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय ट्रफ, जो पहाड़ों की ठंडी हवा को मैदानों की ओर धकेल रहा है।
तीसरा, उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम, जो तेज रफ्तार से ठंडी हवाओं को पूर्व और मध्य भारत की ओर पहुंचा रही है। इन तीनों का संयुक्त असर (Synoptic Weather System) के रूप में छत्तीसगढ़ में महसूस किया जा रहा है।
सुबह धुंध, रात ठंड और दिन में राहत
इन सिस्टम्स के असर से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे मैदानी इलाकों में सुबह के समय हल्की धुंध या कोहरा दिख सकता है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में एक-दो स्थानों पर शीतलहर जैसी स्थिति बनने की आशंका है। हालांकि दिन के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं होगी और धूप निकलने से दोपहर में कुछ राहत मिलेगी। बारिश के कोई संकेत नहीं हैं, क्योंकि असर सिर्फ ठंडी हवाओं तक सीमित है।
ठंड का बच्चों की सेहत पर असर
बढ़ती ठंड का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर देखा जा रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर तेजी से ठंडा होता है, खासकर नवजात शिशुओं में यह खतरा ज्यादा रहता है। यह स्थिति (Winter Health Risk) के रूप में अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन रही है।
आगे क्या रहेंगी सावधानियां
डॉक्टरों और मौसम विशेषज्ञों दोनों की सलाह है कि सुबह-शाम अतिरिक्त गर्म कपड़ों का इस्तेमाल किया जाए, बच्चों और बुजुर्गों को ठंडी हवा से बचाया जाए और रात में शरीर को गर्म रखने के उपाय किए जाएं। आने वाले कुछ दिन छत्तीसगढ़ में ठंड और धूप के इस दोहरे मिजाज के साथ गुजरने वाले हैं।




