सीजी भास्कर, 19 जनवरी | राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी डायरेक्टर के साथ हुआ (Raipur UPI Fraud) एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। ट्रेन से उतरकर घर पहुंचने तक का सफर सामान्य था, लेकिन कुछ ही घंटों में मोबाइल गुम होने के साथ जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने बैंक खाते को भी खाली कर दिया।
सुबह-सुबह की लापरवाही नहीं, शातिर चाल
13 जनवरी की सुबह करीब 5:30 बजे दिल्ली से रायपुर पहुंचने के बाद अधिकारी ऑटो से समता कॉलोनी स्थित अपने निवास गईं। करीब डेढ़ घंटे बाद बैग की साइड पॉकेट देखी, तो मोबाइल गायब था। तत्काल थाने में सूचना दी गई और सिम ब्लॉक कराया गया, लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं हुई।
डुप्लीकेट सिम चालू, और खुला डिजिटल जाल
कुछ दिनों बाद नया हैंडसेट लेकर वही नंबर दोबारा शुरू कराया गया। 16 जनवरी को अचानक बैंक से डेबिट मैसेज आया—5 हजार रुपए निकल चुके थे। यहीं से (Raipur UPI Fraud) का शक गहरा गया। बैंक पहुंचकर स्टेटमेंट निकाला गया, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
तीन दिन, कई ट्रांजैक्शन, लाखों साफ
स्टेटमेंट में दर्ज था कि 13 से 16 जनवरी के बीच यूपीआई के जरिए अलग-अलग ट्रांजैक्शन हुए और कुल 2 लाख 26 हजार 562 रुपए खाते से निकाल लिए गए। बिना ओटीपी, बिना कॉल, रकम खिसक गई। यह (Raipur UPI Fraud) सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने की मिसाल है।
पुलिस जांच | टेक्नोलॉजी से टेक्नोलॉजी की टक्कर
पीड़िता की दोबारा शिकायत पर पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया। मोबाइल की अंतिम लोकेशन, यूपीआई ट्रांजैक्शन लॉग, और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि (Raipur UPI Fraud) जैसे मामलों में सिम-स्वैपिंग और डेटा एक्सेस अहम कड़ी हो सकती है।
सावधानी ही बचाव | आम लोगों के लिए सबक
मोबाइल गुम होते ही सिर्फ सिम ब्लॉक कराना काफी नहीं होता। बैंक, यूपीआई ऐप्स, और ईमेल की तुरंत सूचना जरूरी है। पिन बदलना, डिवाइस सेशन लॉगआउट और अकाउंट फ्रीज जैसे कदम समय पर उठें, तो नुकसान रोका जा सकता है।




