सीजी भास्कर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आदिम जाति विकास विभाग से जुड़े एक सेवा विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित (Chhattisgarh High Court) किया है। विभाग में सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्यरत मीनाक्षी भगत को दिसंबर 2025 के आदेश के जरिए सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर पदावनत किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने डिमोशन आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित उत्तरवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
याचिका के अनुसार, मीनाक्षी भगत की मूल नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुई थी। विभागीय वरिष्ठता सूची में शीर्ष स्थान पर होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया और दिसंबर 2022 में उन्हें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत (Chhattisgarh High Court) किया गया। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से उसी पद पर कार्य किया।
मामले में मोड़ तब आया जब विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई। इसके आधार पर विभाग ने पूर्व में तैयार संयुक्त संवर्ग सूची और पुनरीक्षित बैठक का हवाला देते हुए पद रिक्त न होने की बात कही और डिमोशन का आदेश जारी कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के पदावनति किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायालय ने इस तर्क को गंभीर (Chhattisgarh High Court) मानते हुए डिमोशन आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है।
फिलहाल, मामले में आगे की सुनवाई शेष है और विभाग को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। यह फैसला राज्य के सेवा मामलों में प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर एक अहम संकेत माना जा रहा है।




