सीजी भास्कर, 20 जनवरी | रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़ा CGMSC Scam Case लगातार गहराता जा रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने इस बहुचर्चित मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सिर्फ ओवरप्राइसिंग नहीं, बल्कि संगठित कार्टेल के जरिए की गई सुनियोजित लूट है।
फर्जी दस्तावेजों से भरे गए टेंडर
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पंचकुला स्थित रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, रायपुर की श्री शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर और एक लाइजनर शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि CGMSC Scam Case के तहत इन फर्मों ने फर्जी कागजातों के सहारे टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया और पहले से तय रणनीति के अनुसार बोली लगाई।
‘Hamar Lab Scheme’ में बड़ा खेल
राज्य में आम नागरिकों को मुफ्त जांच सुविधा देने के लिए शुरू की गई (Hamar Lab Scheme) भी इस घोटाले की चपेट में आ गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीदी में जानबूझकर कीमतें बढ़ाई गईं। टेंडर में शामिल कंपनियों ने एक जैसा प्रोडक्ट विवरण, पैक साइज और तकनीकी जानकारी दी, जिससे प्रतिस्पर्धा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई।
कार्टेल पैटर्न से तय हुई दरें
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि तीनों कंपनियों ने एक ही पैटर्न में दरें कोट कीं। सबसे कम बोली एक खास फर्म ने लगाई, जबकि बाकी कंपनियों ने उससे थोड़ी ज्यादा कीमत भरकर औपचारिक प्रतिस्पर्धा दिखाई। इसी Tender Cartel Pattern के जरिए सरकारी एजेंसी से कई गुना अधिक दाम पर सप्लाई सुनिश्चित की गई।
MRP से तीन गुना तक महंगी सप्लाई
जांच दस्तावेजों के अनुसार, कुछ उत्पादों में कीमतों का अंतर चौंकाने वाला है। ₹8 में उपलब्ध एक साधारण मेडिकल ट्यूब ₹2,352 में खरीदी गई, वहीं ₹5 लाख की मशीन की कीमत बढ़ाकर ₹17 लाख तक दिखा दी गई। इस पूरे खेल से शासन को करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आकलन किया गया है।
आरोपी 27 जनवरी तक रिमांड पर
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि CGMSC Scam Case में अभी कई और कड़ियां खुल सकती हैं और पूछताछ के आधार पर आगे भी गिरफ्तारी संभव है।
कैसे खुला घोटाले का पूरा नेटवर्क
यह मामला तब सामने आया जब केंद्र स्तर पर शिकायत के बाद जांच के निर्देश दिए गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि सीमित समय में सैकड़ों करोड़ की खरीदी की गई और नियमों को दरकिनार कर भुगतान पास किए गए। इसके बाद जांच का दायरा अधिकारियों, कंपनियों और बिचौलियों तक फैलता चला गया।
जांच के घेरे में आई कंपनियां, गतिविधियां ठप
जांच तेज होने के बाद कुछ फर्मों की गतिविधियां अचानक बंद हो गईं। संबंधित कंपनियों के व्यापारिक रिकॉर्ड, टैक्स फाइलिंग और संचालन से जुड़े दस्तावेज अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। Medical Procurement Scam से जुड़े हर पहलू को खंगालने की बात कही जा रही है।




