सीजी भास्कर 21 जनवरी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस व्यवस्था एक नए ढांचे में प्रवेश करने जा रही है। Police Commissioner System Chhattisgarh के तहत अब कानून-व्यवस्था की कमान एकीकृत रूप से पुलिस के हाथों में होगी। इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है और इसे पूरे रायपुर जिले में लागू किए जाने की योजना है।
क्या होता है पुलिस कमिश्नरी सिस्टम
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस कमिश्नर को वे अधिकार दिए जाते हैं, जो सामान्य तौर पर जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं। यानी कानून-व्यवस्था, निषेधाज्ञा, लाइसेंस और भीड़ नियंत्रण जैसे मामलों में निर्णय सीधे पुलिस स्तर पर लिए जा सकते हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होती है और जवाबदेही भी स्पष्ट रहती है।
दोहरी व्यवस्था होगी खत्म
अब तक कलेक्टर और एसपी के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर दोहरी व्यवस्था बनी रहती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह भ्रम समाप्त होगा। पुलिस कमिश्नर ही लॉ एंड ऑर्डर का सर्वोच्च अधिकारी होगा, जिससे फैसलों में देरी की संभावना कम होगी और ग्राउंड लेवल पर कार्रवाई तुरंत हो सकेगी।
पूरे जिले में लागू करने का फैसला क्यों
शुरुआत में इसे केवल शहरी सीमा तक सीमित रखने का विचार था, लेकिन बाद में सरकार ने पूरे रायपुर जिले को एक ही सिस्टम में शामिल करने का निर्णय लिया। अलग-अलग क्षेत्रीय व्यवस्था रखने से पुलिस बल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता और हर साल सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ आता। इसके अलावा, सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों के लोगों को दूर-दराज थानों तक जाना पड़ता, जिसे व्यावहारिक नहीं माना गया।
किन इलाकों पर होगा असर
इस नई व्यवस्था के दायरे में रायपुर शहर के साथ-साथ नवा रायपुर अटल नगर, माना क्षेत्र, एयरपोर्ट ज़ोन और औद्योगिक इलाके भी शामिल होंगे। इससे तेजी से बढ़ते शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पुलिस कमिश्नर के अधिकार
पुलिस कमिश्नर को हथियार लाइसेंस, सार्वजनिक आयोजनों की अनुमति, निषेधाज्ञा लागू करने और संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल आदेश जारी करने का अधिकार मिलेगा। इस पद पर केवल IPS अधिकारी की नियुक्ति होती है, जिससे प्रशासनिक अनुभव और फील्ड कमांड दोनों सुनिश्चित होते हैं।
देश में पहले से लागू मॉडल
देश के कई बड़े शहर पहले से इस सिस्टम पर काम कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों के अलावा भोपाल, इंदौर, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में भी यह व्यवस्था लागू है। इन्हीं मॉडलों के अनुभवों के आधार पर रायपुर में इसे लागू किया जा रहा है।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए
नई व्यवस्था से शिकायतों पर कार्रवाई तेज होने, अपराध रोकथाम में मजबूती और पुलिस जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। आम नागरिकों को अब कई मामलों में अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।


