सीजी भास्कर 21 जनवरी दुर्ग जिले के प्रतिष्ठित कल्याण लॉ कॉलेज को लेकर BCI Notice to Kalyan Law College सामने आने के बाद कॉलेज प्रबंधन हरकत में आया। नोटिस के जवाब में कॉलेज की प्रिंसिपल सुशीला यादव दिल्ली पहुंचीं और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष संस्थान की ओर से तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की।
क्या हैं आरोप
नोटिस में आरोप लगाया गया था कि कॉलेज द्वारा छात्रों से बीसीआई के नाम पर वसूले गए 1600 रुपये जमा नहीं किए गए और मान्यता प्रक्रिया अधूरी है। इसी आधार पर वर्ष 2011 से 2025 तक के छात्रों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने की चेतावनी दी गई, जिससे शैक्षणिक समुदाय में चिंता बढ़ गई।
कॉलेज का जवाब और भुगतान का दावा
कॉलेज प्रबंधन ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि 2011 से 2025 की कुल राशि 42 लाख 60 हजार रुपये वर्ष 2023 में ही जमा कर दी गई थी। प्रबंधन के अनुसार, BCI Notice to Kalyan Law College की जड़ भुगतान नहीं, बल्कि रिकॉर्ड अपडेट की तकनीकी चूक है।
सॉफ्टवेयर अपडेट न होने का आरोप
कॉलेज का कहना है कि 2023 में जमा की गई फीस और मान्यता संबंधी विवरण बीसीआई के सॉफ्टवेयर सिस्टम में अपडेट नहीं किए गए, जिसके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। साथ ही 2026 से 2029 तक की फीस जमा करने के लिए मिले नोटिस पर भी तैयारी चल रही थी।
पूर्व छात्रों और विधि जगत की प्रतिक्रिया
नोटिस के बाद कॉलेज से पढ़कर निकले वकीलों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों में असंतोष देखा गया। उनका कहना है कि BCI Notice to Kalyan Law College से संस्थान की वर्षों में बनी साख प्रभावित हुई है, जबकि कॉलेज लंबे समय से विधि शिक्षा में योगदान देता रहा है।
कॉलेज का इतिहास और वर्तमान स्थिति
वर्ष 1962 में स्थापित कल्याण लॉ कॉलेज में वर्तमान में एलएलबी की 150 और एलएलएम की 19 सीटों पर अध्ययन कराया जाता है। यहां से निकले कई विद्यार्थी आज वकालत और न्यायिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
जल्द होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रिंसिपल सुशीला यादव ने बताया कि बीसीआई के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं। वे जल्द ही भिलाई पहुंचकर मीडिया के सामने BCI Notice to Kalyan Law College से जुड़ी पूरी स्थिति सार्वजनिक करेंगी।


