सीजी भास्कर, 22 जनवरी | Republic Day Bastar: गणतंत्र दिवस से पहले बस्तर में इस बार माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। सरकारी तैयारियों के बीच गांवों से लेकर कस्बों तक सक्रियता बढ़ी है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के मौजूदा हालात को लेकर कहा कि अब लोग खुलकर बात कर रहे हैं, हंस रहे हैं और सामूहिक रूप से अपनी बात रखने लगे हैं—यह बदलाव लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है।
सुदूर इलाकों से सामने आ रही आवाज़
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जिन इलाकों में खामोशी थी, वहां अब समूह बनाकर लोग अपनी समस्याएं और सुझाव सामने रख रहे हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ प्रशासनिक उपस्थिति नहीं, बल्कि लोगों के मन से निकला भरोसा है, जो यह बताता है कि बस्तर में लोकतंत्र जमीनी स्तर पर सक्रिय हो रहा है।
गांव-गांव होगी भागीदारी
उन्होंने कहा कि इस बार गणतंत्र दिवस का आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहेगा। बस्तर के सुदूर गांवों तक लोग पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल होंगे। स्थानीय स्तर पर सहभागिता बढ़ने से यह पर्व जन-आंदोलन जैसा रूप ले रहा है।
नई परंपरा की शुरुआत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा बिलासपुर में ध्वजारोहण करने को लेकर उप मुख्यमंत्री ने इसे सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि संभाग मुख्यालयों में जाकर ध्वजारोहण करना एक स्वस्थ परंपरा है, जिससे पूरे प्रदेश में समान सहभागिता और जुड़ाव का संदेश जाता है।
संगठन पर कटाक्ष
राजनीतिक सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी दल को मजबूत संगठन से सीखने में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रवाद केवल नारे नहीं, बल्कि लोगों के मन में विश्वास और जुड़ाव से बनता है (Political Comment Bastar)।
गांवों में साक्षरता का उत्सव
26 जनवरी को बस्तर जिले में गणतंत्र दिवस के साथ-साथ ‘उल्लास मेला’ का आयोजन किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच को गांवों तक पहुंचाने का प्रयास है, जहां साक्षरता को एक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
प्रशासन ने जारी किए निर्देश
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला साक्षरता मिशन के तहत पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और कोटवारों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी शिक्षा विभाग के साथ मिलकर गांवों में सर्वे और जागरूकता अभियान चलाएंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे।
लोकतंत्र की जमीनी तस्वीर
बस्तर में इस बार गणतंत्र दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बदले हुए सामाजिक माहौल का प्रतीक बनता दिख रहा है—जहां लोग डर से नहीं, भरोसे से आगे आ रहे हैं और लोकतंत्र को अपने तरीके से जी रहे हैं।


