सीजी भास्कर, 22 जनवरी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों (Wheat Cultivation) की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर कृषि विभाग की योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। शासन की मंशा है कि किसान केवल खरीफ तक सीमित न रहें, बल्कि रबी फसलों की खेती अपनाकर वर्ष भर अपनी आय में निरंतर बढ़ोतरी करें। इसी नीति के अंतर्गत रबी में गेहूं की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम लागत में अधिक लाभ संभव हो रहा है।
इसी क्रम में जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम सोगड़ा के सीमांत कृषक कीना राम ने रबी मौसम में गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कृषि विभाग मनोरा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्हें एनएफएसएनएम योजना के तहत एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। इससे उनकी खेती की शुरुआती लागत काफी हद तक कम हो गई।
किसान कीना राम ने खेत की बेहतर तैयारी के साथ जैविक गोबर खाद का भरपूर उपयोग किया। समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे फसल में कीट एवं रोग का कोई गंभीर प्रकोप नहीं देखा गया। इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ा, जिससे बेहतर उपज की प्रबल संभावना बनी हुई है। यह उदाहरण दर्शाता है कि वैज्ञानिक पद्धति से की गई गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) किसानों के लिए कितनी लाभकारी साबित हो सकती है।
किसान कीना राम के पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे केवल खरीफ में धान की खेती करते थे और रबी में खेत खाली छोड़ देते थे। इससे न केवल संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पाता था, बल्कि गेहूं और आटा जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी। अब रबी में गेहूं की खेती शुरू करने से उनकी आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी हो रही है और घरेलू उपयोग के लिए भी पर्याप्त अनाज उपलब्ध हो रहा है।
धान के बाद गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) करने से किसानों को कई फायदे मिल रहे हैं, जैसे खाली भूमि का सदुपयोग, मिट्टी की उर्वरता में सुधार, बेहतर गुणवत्ता का अनाज और सालभर आजीविका के साधनों में निरंतरता। कृषि विभाग भी रबी फसलों को लेकर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ लगातार उपलब्ध करा रहा है।
किसान कीना राम ने अन्य किसानों से अपील की है कि वे खरीफ के साथ-साथ रबी मौसम में भी गेहूं, दलहन और तिलहन फसलों की खेती अपनाएं। इससे कम समय और कम लागत में अधिक आमदनी संभव है और किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने कृषि विभाग और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार भी व्यक्त किया।




