सीजी भास्कर, 23 जनवरी। खेती को अक्सर जोखिम और लागत से जोड़कर देखा (Wheat Farming Profit) जाता है, लेकिन जब सही सलाह, समय पर निर्णय और मेहनत एक साथ मिल जाए, तो यही खेती मुनाफे का मजबूत आधार बन सकती है। जशपुर के एक किसान की कहानी इस बात का उदाहरण बन रही है कि सीमित जमीन पर भी समझदारी से खेती कर आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषि विभाग किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसल अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है। इसी कड़ी में मनोरा विकासखंड के ग्राम सोगड़ा निवासी किसान कीना राम ने धान के बाद गेहूं की खेती कर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता चुना है।
किसान कीना राम ने बताया कि कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्हें एनएफएसएनएम योजना के अंतर्गत एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर प्राप्त हुआ। खेत की अच्छी तैयारी, पर्याप्त गोबर खाद, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे फसल की बढ़वार (Wheat Farming Profit) बेहतर रही।
किसान के अनुसार गेहूं की फसल में किसी प्रकार के गंभीर कीट या रोग की समस्या सामने नहीं आई। खेत में खड़ी फसल स्वस्थ नजर आ रही है और उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है। सीमांत किसान होने के बावजूद उन्होंने सीमित संसाधनों का सही उपयोग कर खेती को लाभकारी बनाया है।
कीना राम बताते हैं कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे खरीफ में केवल धान की खेती करते थे और रबी के मौसम में खेत खाली छोड़ (Wheat Farming Profit) देते थे। इससे चावल तो मिल जाता था, लेकिन गेहूं जैसी जरूरी खाद्य सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी। अब रबी में गेहूं की खेती से न सिर्फ अतिरिक्त आमदनी हो रही है, बल्कि अपने घर के लिए आटा भी उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने कहा कि धान के बाद गेहूं की खेती से खेत खाली नहीं रहते, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और गुणवत्ता युक्त अनाज मिलता है। किसान कीना राम ने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे खरीफ के साथ रबी में गेहूं, दलहन और तिलहन की खेती अपनाएं, ताकि कम समय और कम लागत में अच्छी आय के साथ खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इस मार्गदर्शन के लिए कृषि विभाग और राज्य शासन का आभार व्यक्त किया।




