सीजी भास्कर, 23 जनवरी | छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। मौसम विभाग के आकलन के मुताबिक, अगले 48 घंटों के भीतर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में न्यूनतम तापमान में करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। (Chhattisgarh Weather Update) के अनुसार यह बदलाव सुबह-शाम की ठंड को फिलहाल थोड़ा नरम करेगा।
असर कम होते ही बढ़ी तापमान की संभावना
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में सक्रिय रहा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब कमजोर पड़ गया है। इसी कारण प्रदेश में तेज ठंड, कोहरा या शीतलहर जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना नहीं दिख रही है। (Western Disturbance Weak) होने से हवा में नमी भी सीमित रहेगी और दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर जा सकता है।
उत्तर हिस्सों में फिर हल्की गिरावट
हालांकि यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी। अगले चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह गिरावट अचानक नहीं होगी, लेकिन रात और तड़के ठंड का असर फिर महसूस किया जा सकता है। (North Chhattisgarh Cold Trend) के बावजूद बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है।
दुर्ग सबसे गर्म, अंबिकापुर सबसे ठंडा
बीते 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ। आंकड़े बताते हैं कि तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन फिलहाल मौसम स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।
बच्चों की सेहत पर दिख रहा ठंड का असर
ठंड के उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर देखने को मिल रहा है। बीते एक महीने में राजधानी सहित निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से ठंडा होता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। (Cold Impact Children) एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत के रूप में सामने आया है।
क्या है खतरा और क्यों बढ़ जाता है जोखिम
हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति मानी जाती है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य स्तर से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खोता है। अगर बच्चा या कोई व्यक्ति ठंडे पानी में हो, तो यह प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाती है। (Hypothermia Risk) की स्थिति में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।


