सीजी भास्कर, 23 जनवरी। बकुलाही स्थित मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में हुए भीषण औद्योगिक हादसे के मामले में राज्य शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर दुर्घटना की प्रारंभिक जांच के बाद (Real Ispat Plant Accident) में सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत की गई।
सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को सुबह करीब 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल पर कार्य के दौरान अचानक विस्फोट हुआ और अत्यधिक गर्म ऐश की बौछार से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था, जो अत्यंत जोखिमपूर्ण प्रक्रिया थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा बलौदाबाजार द्वारा उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर साक्ष्य संकलित किए गए। इस प्रक्रिया के दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि (Real Ispat Plant Accident) में कारखाना प्रबंधन द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन नहीं किया गया। बिना किल्न शटडाउन किए श्रमिकों से अत्यधिक खतरनाक परिस्थितियों में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर का हाइड्रोलिक स्लाइड गेट बंद नहीं किया गया था, न ही उचित वर्क परमिट जारी किया गया। इसके अलावा नियमित मेंटेनेंस का अभाव पाया गया और श्रमिकों को हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में संचालित किए जा रहे थे। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित कर उनके प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित सभी श्रमिकों को उनका देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने दो टूक कहा है कि (Real Ispat Plant Accident) जैसे मामलों में श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ने कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कारखानों के विरुद्ध आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


