सीजी भास्कर, 23 जनवरी | छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने कथित मानसिक दबाव के बीच पहले अपनी पत्नी की हत्या कर दी और फिर खुद फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मामला (PNB Harassment Case) के तौर पर जांच के दायरे में आ गया है।
गढ़ बेंगाल गांव में खून से सना कमरा
घटना नारायणपुर से सटे गढ़ बेंगाल गांव की है। जानकारी के मुताबिक तिलक राम मंडावी अपनी पत्नी सुमित्रा मंडावी के साथ घर में मौजूद था। दोपहर के समय सुमित्रा खून से लथपथ हालत में कमरे से बाहर निकली, जिसके बाद परिजनों को अनहोनी का अंदेशा हुआ।
PNB Harassment Case में क्या हुआ कमरे के अंदर
परिजन जब कमरे में पहुंचे तो देखा कि तिलक राम फंदे से लटका हुआ था और जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था। तत्काल उसे नीचे उतारा गया और पति-पत्नी दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। महिला की हालत गंभीर थी, जबकि पति बेसुध अवस्था में था।
रायपुर रेफर, फिर टूटा परिवार
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को रायपुर रेफर किया। महिला के गले की नस कट चुकी थी। इलाज के दौरान 17 जनवरी को सुमित्रा मंडावी की मौत हो गई, जबकि तिलक राम का उपचार अभी जारी है।
कमरे से मिला गंभीर आरोपों वाला पत्र
मामले की दिशा उस वक्त बदली जब पुलिस को दंपती के कमरे से एक लिखित पत्र मिला। यह पत्र एक संस्था को संबोधित था, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र ने (Bank Pressure Allegation) को इस केस का केंद्रीय बिंदु बना दिया।
पैसों के लेन-देन का जिक्र
पत्र में लिखा गया है कि सुमित्रा की आईडी का इस्तेमाल केवल आधार लिंकिंग के लिए होता था। KYC और CRM की प्रक्रिया बैंक कर्मचारियों द्वारा की जाती थी। इसके बावजूद दंपती को गलत तरीके से ग्राहकों का पैसा निकालने के आरोप में फंसाया जा रहा था।
कैश और डिजिटल ट्रांजैक्शन
लेटर के अनुसार तिलक राम मंडावी ने अलग-अलग खातों में 1 लाख 37 हजार रुपये जमा किए थे। इसके अलावा एक बैंक कर्मचारी को 30 हजार रुपये नकद दिए गए और 20 हजार रुपये फोन-पे के जरिए उसके परिजन को ट्रांसफर किए गए। इसके बावजूद लगातार दबाव और धमकियां दी जा रही थीं।
हर एंगल से जांच
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कई बिंदुओं पर की जा रही है—घरेलू विवाद, आर्थिक दबाव और बैंकिंग लेन-देन से जुड़े आरोप। पत्र की सत्यता, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। यह केस अब (Financial Stress Tragedy) के रूप में देखा जा रहा है।
सवालों के घेरे में सिस्टम
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस दबाव की कहानी है जो छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों पर पड़ता है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह त्रासदी किन परिस्थितियों और किन जिम्मेदारियों की देन है।


