सीजी भास्कर, 24 जनवरी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की औपचारिक घोषणा होने जा रही है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के बाजारों में आसान और कम शुल्क वाली पहुंच देंगे। इसके बाद भारतीय उत्पादों को यूरोप के विशाल बाजार में नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते के तहत यूरोपीय उत्पादों को भारत में कम या शून्य टैरिफ पर प्रवेश (India EU FTA Deal) मिलेगा, जबकि भारत के टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा, जेम्स-ज्वेलरी, आईटी और सर्विस सेक्टर के उत्पाद यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे यूरोप के लिए ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ बताया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह भारत के निर्यात और निवेश के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU के बीच व्यापार लगभग 136.5 अरब डॉलर रहा, जो FTA के बाद बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इस डील से ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत आधार मिलेगा और यूरोपीय कंपनियों का भारत में निवेश (India EU FTA Deal) बढ़ेगा। तकनीक हस्तांतरण आसान होगा और मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, लॉजिस्टिक्स तथा MSME सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FTA के बाद भारत-यूरोप के बीच मजबूत सप्लाई चेन विकसित होगी, जिससे चीन पर निर्भरता कम होगी। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी और देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगा।


