सीजी भास्कर, 26 जनवरी। कुछ सम्मान ऐसे होते हैं जो अचानक नहीं मिलते, बल्कि वर्षों की निःशब्द तपस्या का परिणाम (Bastar Padma Shri Honour) होते हैं। जब सेवा बिना प्रचार के की जाए और करुणा आदत बन जाए, तब पहचान खुद चलकर दरवाज़ा खटखटाती है। आज छत्तीसगढ़ के लिए ऐसा ही एक गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है।
बस्तर की सेवा-संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर बड़ी पहचान (Bastar Padma Shri Honour) मिली है। समाजसेवा और मानवीय करुणा की प्रतीक ‘बड़ी दीदी’ के नाम से प्रसिद्ध बुधरी ताटी, तथा जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ सेवा में जुटे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले का चयन पद्म श्री सम्मान के लिए किया गया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल तीन व्यक्तियों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि बस्तर की आत्मा, उसकी सेवा भावना और उसकी संस्कृति का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। उन्होंने इन विभूतियों को बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और जनजातीय क्षेत्रों में जिस संवेदनशीलता, धैर्य और समर्पण के साथ इन लोगों ने काम किया, वह आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में दुर्लभ (Bastar Padma Shri Honour) उदाहरण है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा मंच की मोहताज नहीं होती, बल्कि समय आने पर स्वयं बोल उठती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताटी का स्नेहपूर्ण व्यवहार और गोडबोले दंपती की सतत चिकित्सा व सामाजिक सेवा ने हजारों ज़िंदगियों को नई दिशा (Bastar Padma Shri Honour) दी है। वर्षों तक बिना किसी अपेक्षा के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए किया गया यह कार्य आज देश की चेतना द्वारा पहचाना गया है।
मुख्यमंत्री साय ने इसे छत्तीसगढ़ की मानवीय (Bastar Padma Shri Honour) परंपरा और जनजातीय समाज की ताकत का प्रमाण बताते हुए कहा कि ऐसे सम्मान आने वाली पीढ़ियों को सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।




