सीजी भास्कर, 29 जनवरी | Ram Statue Installation Kaushalya Dham : रायपुर के चंदखुरी स्थित कौशल्या माता धाम में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक क्षण आने वाला है। यहां प्रभु श्रीराम की नई प्रतिमा स्थापना की तैयारी पूरी कर ली गई है। ग्वालियर में निर्मित यह प्रतिमा अब छत्तीसगढ़ लाने की प्रक्रिया में है, जिसके लिए विशेष टीम रवाना हो चुकी है।
कुछ दिनों में पहुंचेगी प्रतिमा
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अनुसार, प्रतिमा को विशेष सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था के साथ लाया जा रहा है। टीम के लौटते ही शुभ मुहूर्त देखकर भगवान श्रीराम की प्रतिमा को कौशल्या माता धाम परिसर में स्थापित किया जाएगा। इसे लेकर मंदिर प्रशासन और विभागीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
पहले बनी प्रतिमा क्यों बदली गई
पर्यटक एवं संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य ने बताया कि पहले जो प्रतिमा तैयार की गई थी, वह तय मानकों और अनुपात के अनुरूप नहीं थी। इसी कारण विभाग ने उसे स्वीकार नहीं किया और नई प्रतिमा तैयार कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रतिमा को रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि मंदिर की गरिमा और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप स्थापना हो सके।
वनवासी स्वरूप में 51 फीट ऊंची प्रतिमा
नई प्रतिमा की सबसे खास बात इसका वनवासी स्वरूप है। भगवान श्रीराम की यह प्रतिमा 51 फीट ऊंची है, जिसे उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा, जहां वर्तमान में श्रीराम की प्रतिमा मौजूद है। यह स्वरूप रामायण काल के वनवास काल की भावना को दर्शाता है, जिसे श्रद्धालु निकट से अनुभव कर सकेंगे।
राष्ट्रपति सम्मानित मूर्तिकार की कृति
इस प्रतिमा का निर्माण मध्य प्रदेश के ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा द्वारा किया गया है, जिन्हें राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा जा चुका है। प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में किया गया, जहां महीनों की मेहनत के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।
108 रुद्राक्ष मनकों की विशेषता
प्रतिमा में आध्यात्मिक प्रतीकात्मकता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। श्रीराम की इस मूर्ति में 108 मनकों वाला रुद्राक्ष दर्शाया गया है, जो सनातन परंपरा में आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह प्रतिमा धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष मानी जा रही है।
पर्यटन और आस्था दोनों को मिलेगा बढ़ावा
नई प्रतिमा की स्थापना के बाद कौशल्या माता धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि राज्य के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में भी इसकी गिनती और मजबूत होगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।




