सीजी भास्कर, 29 जनवरी | Medical PG Admission Rules : छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि नियमों में बदलाव के बाद पहले से किए गए सीट अलॉटमेंट को वैध नहीं माना जा सकता। ऐसे में अब अभ्यर्थियों को नई काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए ही सीट प्राप्त करनी होगी।
नियम 11 में संशोधन के बाद खत्म हुआ पुराना अधिकार
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2025 के नियम 11 में संशोधन लागू होते ही पूर्व में आवंटित सीट पर बने रहने का कोई अधिकार शेष नहीं रह जाता। अदालत के अनुसार, नियम बदले जाने की स्थिति में पुरानी प्रवेश प्रक्रिया स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
याचिका की पृष्ठभूमि: पहले अलॉटमेंट के बाद रद्द हुई काउंसलिंग
मामला भिलाई निवासी अनुष्का यादव की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 22 और 23 जनवरी 2026 को जारी शासनादेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के तहत पहले से पूरी हो चुकी पीजी मेडिकल काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट को रद्द कर दिया गया था।
मेरिट से मिली थी सीट, फीस और बैंक गारंटी भी जमा
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उन्हें मेरिट के आधार पर निजी मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस विषय की सीट मिली थी। उन्होंने लगभग 10.79 लाख रुपये फीस और 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर कॉलेज जॉइन भी कर लिया था, इसके बावजूद प्रवेश रद्द कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का तर्क: एक बार प्रवेश के बाद रद्द करना अनुचित
याचिका में कहा गया कि एक बार एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे निरस्त करना छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। इसे मनमाना और अवैधानिक बताते हुए राहत की मांग की गई थी।
शासन का पक्ष: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप कार्रवाई
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि काउंसलिंग रद्द करने का निर्णय न्यायिक निर्देशों के पालन में लिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया कि पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में डोमिसाइल आधारित आरक्षण असंवैधानिक है और केवल सीमित स्तर तक संस्थागत प्राथमिकता ही दी जा सकती है।
नई व्यवस्था: 50% सीटें संस्थागत, 50% ओपन मेरिट से
संशोधित नियमों के अनुसार, 50 प्रतिशत पीजी मेडिकल सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होंगी जिन्होंने छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस किया है, जबकि शेष 50 प्रतिशत सीटें पूरी तरह ओपन मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी।
हाईकोर्ट की दो टूक: प्रोविजनल अलॉटमेंट अंतिम नहीं
अदालत ने कहा कि जब प्रवेश प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा और नियमों के अधीन हो, तब प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर याचिका खारिज करते हुए शासन के निर्णय को सही ठहराया गया।
अब नई याचिकाओं पर रोक, नई काउंसलिंग का रास्ता साफ
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस विषय में अब कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद राज्य में मेडिकल पीजी सीटों के लिए नए नियमों के तहत दोबारा काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।




