सीजी भास्कर, 29 जनवरी | Hindu Rashtra Campaign : गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग प्रवास पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रयागराज माघ मेले से जुड़े विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि पूरे मामले को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।
‘स्नान नहीं, अव्यवस्था बनी वजह’—शंकराचार्य निश्चलानंद
स्वामी निश्चलानंद ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से नहीं रोका गया था, बल्कि अत्यधिक तामझाम, व्यवस्थागत अव्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की स्थिति के कारण उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
मामले को जानबूझकर गलत रंग दिया गया
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक संवेदनशील धार्मिक विषय को विवाद का रूप दे दिया गया। वास्तविकता यह है कि प्रशासनिक असंतुलन के चलते स्थिति बिगड़ी, लेकिन इसे किसी धार्मिक अपमान की तरह प्रस्तुत किया गया।
हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर क्या बोले शंकराचार्य
स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का विचार किसी समुदाय, मत या व्यक्ति के विरोध में नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा, सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक वैचारिक अभियान है।
‘सनातन धर्म शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है’
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा दुनिया को नैतिकता, सह-अस्तित्व और शांति का संदेश देती है। हिंदू राष्ट्र का अर्थ शासन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना है।
अंडा गांव में होगा प्रवचन और संवाद कार्यक्रम
शंकराचार्य निश्चलानंद ने बताया कि दुर्ग जिले के अंडा गांव में भक्तों से संवाद और आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया है, जहां सनातन दर्शन और राष्ट्र की भूमिका पर विचार साझा किए जाएंगे।
प्रयागराज माघ मेले से लौटे अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले से बिना स्नान किए काशी प्रस्थान कर लिया है। उन्होंने कहा था कि मानसिक पीड़ा की स्थिति में संगम का जल भी शांति नहीं दे पाता।
सम्मानजनक प्रस्ताव भी किया गया था अस्वीकार
माघ मेला प्रशासन द्वारा पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाने और पुष्पवर्षा के प्रस्ताव को भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अस्वीकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब आत्मा आहत हो, तो औपचारिक सम्मान व्यर्थ हो जाता है।
विवाद पहुंचा न्यायिक स्तर तक
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। लेटर पिटिशन के माध्यम से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा, लेकिन शंकराचार्य शेष स्नानों में शामिल नहीं होंगे।
18 जनवरी की घटना से बढ़ा विवाद
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन पालकी रोके जाने, शिष्यों से कथित धक्का-मुक्की और हिरासत की घटनाओं के बाद विवाद गहराया। इसके बाद संत समाज भी दो मतों में बंटता दिखा।




