सीजी भास्कर 29 जनवरी छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में 1 फरवरी से 15 फरवरी तक Rajim Kumbh Kalp Mela 2026 का आयोजन होने जा रहा है। मेले को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और प्रशासनिक अमला व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहा है। हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जो माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक संगम तट पर कल्पवास और स्नान करेंगे।
कल्पवास की वही परंपरा, वही अनुशासन
राजिम में होने वाला कल्पवास ठीक उसी परंपरा का अनुसरण करता है, जैसा प्रयागराज के माघ मेले में देखने को मिलता है। साधु-संतों के शिविर, यज्ञ, प्रवचन और नियमित स्नान की परंपरा इस मेले को विशेष बनाती है। इसी कारण राजिम को (Chhattisgarh Prayag Rajim) कहा जाता है, जहां आस्था और अनुशासन साथ-साथ चलते हैं।
चार धाम का फल एक ही यात्रा में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु चार धाम की यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए राजिम आगमन को चारों धाम के समान पुण्यदायी माना गया है। राजीव लोचन मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन को ही चार धाम यात्रा का सार बताया जाता है। मान्यता है कि यहां आकर श्रद्धालु को संपूर्ण तीर्थों का फल प्राप्त होता है।
जहां कमल से रची गई सृष्टि
लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि सृष्टि की रचना का आरंभ यहीं से हुआ था। भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल पर ब्रह्मा ने सृष्टि की संरचना की—ऐसी आस्था आज भी लोगों के मन में जीवित है। यही कारण है कि राजिम केवल मेला स्थल नहीं, बल्कि (Creation Belief Rajim) का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
भोग और रहस्य की अनकही कथा
राजीव लोचन मंदिर से जुड़ा एक रहस्य आज भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मान्यता है कि दोपहर की आरती में अर्पित भोग को भगवान विष्णु स्वयं ग्रहण करने आते हैं। कई बार भोग की थाली पर उंगलियों के निशान दिखाई देने की बातें सामने आई हैं। जांच भी हुई, लेकिन रहस्य आज तक रहस्य ही बना हुआ है।
दिन में बदलते हैं दर्शन
करीब 9वीं सदी में निर्मित यह मंदिर स्थापत्य और आस्था का अनूठा संगम है। यहां भगवान विष्णु के दर्शन दिन के अलग-अलग समय में भिन्न रूपों में होते हैं—सुबह बाल्य अवस्था, दोपहर में युवावस्था और रात्रि में वृद्धावस्था। मंदिर के बारह स्तंभों पर दुर्गा, गंगा, यमुना, राम और नृसिंह अवतार की आकृतियां उकेरी गई हैं, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाती हैं।
शराब और मांस पर सस्पेंस
मेले को लेकर एक अहम सवाल यह भी है कि इस दौरान शराब और मांस की दुकानों पर क्या निर्णय होगा। फिलहाल दुकानों को बंद रखने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। आमतौर पर मेला अवधि में स्थानीय प्रशासन 15 दिनों के लिए शराब दुकानों को बंद करता रहा है। श्रद्धालुओं की मांग है कि आस्था और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए इस बार भी सख्त निर्णय लिया जाए।




