सीजी भास्कर, 30 जनवरी | Rajya Sabha Election Petition : साल 2018 के राज्यसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका पर सुनवाई एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश किए गए सभी नौ गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। अब अदालत के समक्ष सरोज पांडेय और उनके समर्थकों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
निर्वाचन को दी गई है कानूनी चुनौती
भाजपा नेत्री सरोज पांडेय के राज्यसभा निर्वाचन को कांग्रेस उम्मीदवार लेखराम साहू ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन और शपथ पत्र में आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गईं, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
मार्च 2018 का चुनाव फिर चर्चा में
मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव हुआ था। इस चुनाव में भाजपा की ओर से सरोज पांडेय और कांग्रेस की ओर से लेखराम साहू मैदान में थे। मतदान से पहले ही नामांकन पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसने बाद में कानूनी रूप ले लिया।
शपथ पत्र पर उठे थे सवाल
कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि सरोज पांडेय के शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी ने इन आपत्तियों को अस्वीकार कर दिया था और चुनाव संपन्न हुआ।
आयोग से लेकर राजभवन तक पहुंचा मामला
नामांकन को लेकर उठा विवाद केवल निर्वाचन अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। यह मामला केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल तक भी पहुंचा, लेकिन किसी स्तर पर हस्तक्षेप नहीं हुआ। इसके बाद मतदान हुआ और परिणाम घोषित किए गए, जिसमें सरोज पांडेय विजयी रहीं।
चुनाव परिणाम के बाद दाखिल हुई याचिका
परिणाम घोषित होने के बाद पराजित उम्मीदवार लेखराम साहू ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। याचिका में शपथ पत्र में गलत जानकारी देने और कुछ विधायकों को कथित रूप से मतदान का अधिकार दिए जाने को प्रमुख आधार बनाया गया है।
18 विधायकों के मतदान पर विवाद
याचिका में यह भी कहा गया है कि 18 विधायक उस समय लाभ के पद पर थे। आरोप है कि 11 विधायक संसदीय सचिव और 7 विधायक निगम-मंडलों में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर थे, इसलिए उन्हें मतदान से रोका जाना चाहिए था।
आपत्तियां पहले भी हो चुकीं खारिज
इन विधायकों को लेकर की गई आपत्तियों को उस समय के राज्यसभा निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया था। अब वही मुद्दे अदालत में विस्तार से परखे जा रहे हैं, जिससे मामला फिर से चर्चा में आ गया है।
अदालत में दर्ज हुई अहम गवाही
सुनवाई के दौरान विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही दर्ज की गई। इसके साथ ही याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत सभी साक्ष्य पूरे हो गए हैं।
बचाव पक्ष को मिला समय
सरोज पांडेय की ओर से पेश अधिवक्ता ने शपथ पत्र और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अगली सुनवाई में बचाव पक्ष की गवाही दर्ज की जाएगी।
कानूनी लड़ाई का अगला चरण
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बचाव पक्ष की गवाही और दस्तावेजों के बाद अदालत किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह मामला न केवल एक निर्वाचन विवाद है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को भी सामने रखता है।




