सीजी भास्कर 1 फरवरी Congress Budget Reaction 2026 : केंद्रीय बजट पेश होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी कांग्रेस ने बजट 2026-27 को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे अपेक्षाओं से कमजोर बताया है। पार्टी का कहना है कि जिस बड़े प्रभाव का दावा किया जा रहा था, वह भाषण और प्रस्तावों में दिखाई नहीं दिया।
जयराम रमेश का सीधा आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बजट को लेकर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि दस्तावेजों का गहन अध्ययन अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती 90 मिनट में ही तस्वीर साफ हो गई। उनके अनुसार, बजट को लेकर जो माहौल पहले से बनाया गया था, उसके मुकाबले यह प्रस्तुति काफी हल्की साबित हुई। उन्होंने इसे Budget Transparency Issue से जुड़ा मामला बताया।
भाषण पर भी उठे सवाल
जयराम रमेश ने केवल नीतियों ही नहीं, बल्कि बजट भाषण की शैली पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि इस बार भाषण में प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए वास्तविक बजटीय आवंटन को स्पष्ट तरीके से सामने नहीं रखा गया। इससे आम जनता के लिए यह समझना मुश्किल हो गया कि किस सेक्टर को कितना लाभ मिला।
टैक्स स्लैब में यथास्थिति
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट पेश करते हुए यह साफ कर दिया कि इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का तर्क है कि स्थिर कर नीति से लंबी अवधि में निवेश और आर्थिक संतुलन को मजबूती मिलेगी, हालांकि विपक्ष इसे मध्यम वर्ग की अनदेखी मान रहा है।
घाटा, ग्रोथ और सरकारी दावा
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि देश तेजी से आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है और Economic Growth Vision India के तहत नीतियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
‘विकसित भारत’ पर सरकार का भरोसा
सरकार का कहना है कि विकास के लाभ किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचाने पर फोकस किया गया है। वित्त मंत्री ने दोहराया कि दीर्घकालिक निवेश और वैश्विक बाजार के साथ तालमेल बनाकर भारत को आगे ले जाने की रणनीति पर काम जारी रहेगा।
बहस अभी बाकी
कुल मिलाकर बजट 2026-27 को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। जहां सरकार इसे भविष्य की मजबूत नींव बता रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि जमीन पर असर दिखाने के लिए इससे कहीं ज्यादा स्पष्टता और ठोस कदमों की जरूरत है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस बजट पर बहस और तेज होने के संकेत हैं।




