सीजी भास्कर 1 फरवरी Chabahar Port Project Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026 पेश होते ही विदेश नीति और रणनीतिक परियोजनाओं पर नजर रखने वालों की नजर एक नाम पर टिक गई—चाबहार। इस बार बजट दस्तावेजों में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए किसी भी तरह का वित्तीय प्रावधान नजर नहीं आया, जबकि बीते वर्षों में इसके लिए नियमित रूप से फंड रखा जाता रहा है।
पहले हर साल मिलता था सहारा
पिछले कुछ सालों तक भारत इस परियोजना के लिए सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करता रहा है। ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित इस बंदरगाह को भारत की कनेक्टिविटी रणनीति का अहम स्तंभ माना जाता रहा है। ऐसे में बजट से इसका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े करता है।
Chabahar Port Project Budget 2026 और अमेरिकी दबाव की छाया
ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध लंबे समय से इस परियोजना के रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती रहे हैं। पिछले साल भारत को अस्थायी राहत जरूर मिली थी, लेकिन वह छूट अब समाप्ति की ओर है। इसी पृष्ठभूमि में बजट में फंड न होना, अंतरराष्ट्रीय दबावों की ओर इशारा करता है।
कूटनीति बनाम आर्थिक जोखिम
सरकार की ओर से पहले यह संकेत दिए जा चुके हैं कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ संवाद में है। लेकिन वैश्विक व्यापार पर संभावित अतिरिक्त टैरिफ और प्रतिबंधों के खतरे ने इस परियोजना को आर्थिक रूप से संवेदनशील बना दिया है। यही कारण है कि बजट में सतर्क रुख अपनाया गया माना जा रहा है।
Chabahar Port Project Budget 2026 और भारत-ईरान साझेदारी
चाबहार बंदरगाह केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक भी रहा है। दोनों देश इसे क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विकसित कर रहे हैं, ताकि मध्य एशिया और यूरोप तक वैकल्पिक मार्ग मजबूत हो सके।
INSTC से जुड़ा बड़ा सपना
इस बंदरगाह को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का अहम हिस्सा बनाने की योजना है। यह मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क एशिया से यूरोप तक व्यापार की दूरी और लागत घटाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में बजट में फंड का न होना रणनीतिक असमंजस को दिखाता है।
Chabahar Port Project Budget 2026 का संकेत
कुल मिलाकर, बजट 2026 में चाबहार के लिए फंड न होना यह साफ करता है कि भारत फिलहाल इस परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले वैश्विक हालात का आकलन कर रहा है। यह ठहराव स्थायी है या सिर्फ रणनीतिक विराम—इसका जवाब आने वाले महीनों में कूटनीतिक कदम तय करेंगे।




