सीजी भास्कर 1 फरवरी Budget 2026 Fisheries Boost: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने पारंपरिक खेती से इतर ग्रामीण आय के नए रास्तों पर फोकस बढ़ाया है। इस बार बजट में मत्स्य पालन को केवल सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।
अमृत सरोवर और जलाशयों से बदलेगा ग्रामीण नक्शा
बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एक साथ विकास की घोषणा को अहम माना जा रहा है। इससे तटीय और ग्रामीण इलाकों में मत्स्य संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम स्थानीय रोजगार और Sustainable Aquaculture Growth को नई रफ्तार दे सकता है।
महिला समूहों और स्टार्टअप्स को सीधा बाजार
सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और मछली किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बाजार से सीधे जोड़ने पर जोर दिया है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और मछुआरों की आय में सीधा इजाफा होगा। यह मॉडल Rural Livelihood Model को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
KCC लोन सीमा बढ़ी, मछुआरों को राहत
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब मछुआरों और डेयरी किसानों को मिलने वाले लोन की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। ब्याज सब्सिडी के साथ यह सुविधा छोटे स्तर पर काम कर रहे लोगों के लिए बड़ा सहारा बनेगी।
सी-फूड निर्यात पर सरकार का फोकस
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ मजबूत करने के लिए फ्रोजन फिश पेस्ट (सुरिमी) पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 30% से घटाकर 5% कर दिया गया है। वहीं, मछली और झींगा चारे में इस्तेमाल होने वाले फिश हाइड्रोलाइसेट पर ड्यूटी भी कम की गई है। इससे Seafood Export India को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप पर खास नजर
सरकार भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और हाई-सीज में मत्स्य संसाधनों के टिकाऊ उपयोग के लिए नई व्यवस्था लाने जा रही है। इसमें अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह को केंद्र में रखा गया है, जिससे समुद्री अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का उपयोग हो सके।
दुनिया में दूसरे स्थान पर है। करीब 60 हजार करोड़ रुपये के सी-फूड निर्यात के साथ, बजट 2026 के ये प्रावधान आने वाले वर्षों में ग्रामीण आय, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को नई दिशा दे सकते हैं।




