सीजी भास्कर, 05 फरवरी | Health System Reform : प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य विभाग की दो वर्षों की प्रगति और आने वाले तीन वर्षों की दिशा सार्वजनिक की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अस्पतालों में इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी से पहले पहचान, रोकथाम और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा देना प्राथमिकता है।
डॉक्टर–नर्स बने सिस्टम की ताकत
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की असली रीढ़ मानव संसाधन होता है। बीते दो वर्षों में डीएचएस और एनएचएम के तहत डॉक्टर, नर्स और अन्य कैडर के कुल 1639 पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। वहीं, लगभग 2300 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति हर माह ऑनलाइन आवेदन के ज़रिये की जा रही है।
अस्पतालों का नेटवर्क हुआ मजबूत
जायसवाल ने कहा कि स्टाफ के साथ-साथ अधोसंरचना पर भी समान रूप से काम हुआ है। 15वें वित्त आयोग, PM-ABHIM और राज्य बजट के माध्यम से प्रदेश में तीन जिला अस्पताल, दो 220-बिस्तर सिविल अस्पताल, आठ 100-बिस्तर सिविल अस्पताल, एक 200-बिस्तर मानसिक अस्पताल (सेन्दरी), एक MCH अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 34 उप स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य की नई पहचान
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब प्राथमिक स्वास्थ्य की धुरी बन चुके हैं। प्रदेशभर में बीते दो वर्षों में लगभग तीन लाख आरोग्य मेले आयोजित किए गए, जहां इलाज के साथ वेलनेस सेवाएं भी दी गईं। इसके साथ ही 12 IPHL लैब, 31 BPHU और एक क्रिटिकल हेल्थ केयर ब्लॉक को स्वीकृति मिली है। आने वाले तीन वर्षों में सभी विकासखंडों में BPHU और हर जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में IPHL लैब स्थापित की जाएगी।
लाखों परिवारों को राहत
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दो वर्षों में 31.44 लाख से अधिक क्लेम प्रकरणों में 4551 करोड़ रुपये का उपचार भुगतान किया गया। राज्य के लगभग 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, जिनमें से 38.98 लाख कार्ड पिछले दो वर्षों में जारी हुए। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 2273 लाभार्थियों को 62.20 करोड़ रुपये का इलाज मिला।
गुणवत्ता में ऐतिहासिक कदम
नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम के अंतर्गत 884 शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों का गुणवत्ता प्रमाणीकरण किया गया है। रायपुर और बलौदाबाजार जिला अस्पतालों की IPHL लैब को केंद्र सरकार से गुणवत्ता प्रमाणन मिला, जो देश में इस उपलब्धि को हासिल करने वाले शुरुआती अस्पतालों में शामिल हैं। लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में राज्य के सभी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र NQAS प्रमाणित हों।
टेली-मेडिसिन से गांव तक इलाज
टेली-मेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दो लाख से अधिक लोगों को स्वास्थ्य परामर्श और उपचार दिया गया। गैर संचारी रोगों पर फोकस करते हुए 80 लाख से अधिक नागरिकों की BP और शुगर जांच तथा 20 लाख से अधिक लोगों की कैंसर स्क्रीनिंग की गई। टीकाकरण लक्ष्य का 94 प्रतिशत से अधिक हासिल हुआ है और 21,164 कुपोषित बच्चों को पोषण व उपचार उपलब्ध कराया गया।
टीबी से मलेरिया तक निर्णायक नियंत्रण
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 12 लाख से अधिक टीबी संदिग्धों की जांच की गई, 93 प्रतिशत सफलता दर के साथ 4106 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.6 प्रतिशत से घटकर 0.59 प्रतिशत तक आ गई है। डेंगू और फाइलेरिया पर भी प्रभावी नियंत्रण दर्ज किया गया है।
सिकल सेल पर विशेष अभियान
जनजातीय अंचलों में सिकल सेल पर विशेष ध्यान देते हुए 1.68 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 27,396 मरीज चिन्हित किए गए। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिवासी क्षेत्रों के लिए 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गई हैं। मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, तेज और भरोसेमंद बनाया जाएगा।




