रायपुर जिले में चल रहे Voter List Verification Raipur अभियान के दौरान मतदाता सूची में भारी स्तर पर त्रुटियां सामने आई हैं। प्रशासनिक आकलन के अनुसार, करीब 5 लाख 42 हजार मतदाताओं को अपने दस्तावेज और व्यक्तिगत विवरण का दोबारा सत्यापन कराना आवश्यक है, ताकि सूची को अंतिम रूप दिया जा सके।
नाम, उम्र और पहचान से जुड़ी गलतियां उजागर
जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम, उम्र, पिता का नाम, लिंग और अन्य विवरणों में असंगतियां दर्ज हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 4 लाख 22 हजार मतदाताओं की प्रविष्टियों में त्रुटियां पाई गईं, जबकि करीब 1 लाख 33 हजार मामलों में वर्ष 2003 और 2025 के दस्तावेज आपस में मेल नहीं खा रहे हैं।
नोटिस के बावजूद नहीं पहुंच रहे मतदाता
प्रशासन का कहना है कि लगभग 90 प्रतिशत प्रभावित मतदाताओं तक सूचना और नोटिस पहुंचा दिए गए हैं। इसके बावजूद सत्यापन केंद्रों पर अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुंच रहे। इसी कारण रायपुर जिले के राज्य में सबसे अधिक नाम कटने वाले जिलों में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जो Voter List Verification Raipur प्रक्रिया को और संवेदनशील बनाता है।
सात विधानसभा क्षेत्रों में फैला असर
रायपुर जिले की सात विधानसभा सीटों में कुल करीब 18 लाख 92 हजार मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 5 लाख 42 हजार मतदाताओं को दस्तावेजों के साथ अनिवार्य सत्यापन कराना है, जबकि शेष मतदाताओं के नाम प्रारंभिक सूची में बिना किसी विवाद के दर्ज पाए गए हैं।
महिला मतदाताओं में अधिक पाई गई गड़बड़ी
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि त्रुटि वाले मामलों में महिला मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। प्रशासन इसे रिकॉर्ड अपडेट न होने और पहचान से जुड़े पुराने दस्तावेजों का असर मान रहा है, जिसे Voter List Verification Raipur के तहत दुरुस्त किया जाना है।
14 फरवरी के बाद नहीं मिलेगा सुधार का मौका
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें 14 फरवरी तक अपनी जानकारी में सुधार कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद 15 से 20 फरवरी तक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।
मतदान अधिकार बचाने की प्रशासन की अपील
अधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराएं, ताकि भविष्य में मतदान के अधिकार से वंचित होने की स्थिति न बने। तय समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार के संशोधन पर विचार नहीं किया जाएगा।




